NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव में लगे कर्मियों पर लू के प्रभाव को कम करने के लिए उपाय किए

NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव में लगे कर्मियों पर लू के प्रभाव को कम करने के लिए उपाय किए

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वर्तमान ग्रीष्म ऋतु के दौरान लू की स्थिति और सामान्य से अधिक तापमान को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कार्यबल के स्वास्थ्य की रक्षा और राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती उपायों को अनिवार्य करने वाले व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश एनएचएआई के अधिकार क्षेत्र के तहत निर्माण स्थलों, रखरखाव कार्यों और टोल प्लाजा के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल को रेखांकित करते हैं। सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित इन सुरक्षा उपायों को सभी ठेकेदारों, रियायतग्राहियों और टोल संग्रह एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों और श्रमिकों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए तुरंत लागू किया जाएगा।

निर्माण एवं रखरखाव परियोजनाओं के लिए दिशानिर्देश

एनएचएआई ने ठेकेदारों और रियायतग्राहियों को निर्देश दिया है कि वे श्रमिकों के लिए अलग-अलग कार्य घंटे निर्धारित करें, ताकि दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच के भीषण गर्मी के समय से बचा जा सके। डामर बिछाने, वेल्डिंग आदि जैसे श्रम-प्रधान और गर्मी पैदा करने वाले कार्य सुबह जल्दी या देर शाम के समय किए जाने चाहिए। नियमित अंतराल पर अनिवार्य ‘कूलिंग ब्रेक’ निर्धारित किए गए हैं और जिनकी आवृत्ति अत्यधिक गर्मी के अलर्ट के दौरान बढ़ाई जाएगी।

श्रमिकों के अनुकूल पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि नए या वापस लौटने वाले कर्मचारियों को 3-5 दिनों की अवधि में धीरे-धीरे कठिन कार्यों के लिए तैयार किया जा सके। श्रमिकों को लू से संबंधित बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे हीटस्ट्रोक, की पहचान और प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

स्थल पर पर्याप्त सुविधाओं के लिए अस्थायी छायादार विश्राम क्षेत्र, उचित वेंटिलेशन के साथ, तथा ठंडे और स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। प्राथमिक उपचार केंद्र, गश्ती वाहन और साइट पर्यवेक्षकों को ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस) और ग्लूकोज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य होगा, साथ ही सांस लेने योग्य, सूती आधारित ‘हाई विजिबिलिटी’ वेस्ट के उपयोग की सलाह दी गई है।

आपातकालीन तैयारियों को भी मजबूत किया गया है। एनएचएआई की गश्ती एम्बुलेंस में आइस पैक, ठंडा पानी और आईवी फ्लूइड्स उपलब्ध कराए जाएंगे। रूट पेट्रोलिंग यूनिट्स (आरपीयू) को निर्देश दिया गया है कि वे निगरानी की आवृत्ति बढ़ाएं ताकि गर्मी से संबंधित समस्याओं और अत्यधिक गर्मी के कारण वाहन खराब होने की स्थिति में राजमार्ग उपयोगकर्ताओं की सहायता की जा सके।

टोल प्लाजा और संचालन के लिए दिशानिर्देश

टोल संचालन के लिए एनएचएआई ने सलाह दी है कि सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे के बीच कर्मचारियों का बाहरी सम्पर्क न्यनतम रखा जाए। इसके लिए शिफ्ट प्रबंधन और रोटेशनल रोटेशनल ड्यूटी प्रणाली लागू की जाएगी। रात के समय का उपयोग प्रशासनिक और रखरखाव संबंधी कार्यों के लिए किया जाएगा, जिन्हें पीक आवर में करने की आवश्यकता नहीं होती। टोल प्लाजा कर्मचारियों को भी लू से सम्बंधित स्वास्थ्य समस्याओं को पहचान और प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे कर्मचारियों और यात्रियों की सहायता कर सकें।

टोल बूथों, विश्राम क्षेत्रों और कार्यालय भवनों में वातानुकूलित कक्ष बनाए जाएंगे। लेन के पास और खुले क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए अस्थायी शेड और ऑनिंग्ज़ लगाई जाएंगी। इसके अलावा, सभी टोल स्थानों पर ठंडे पेयजल, ओआरएस और ग्लूकोज की निरंतर उपलब्धता अनिवार्य की गई है। इसका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी परियोजना स्थलों और टोल प्लाजा का साप्ताहिक निरीक्षण करेंगे।

ये उपाय लू के प्रभाव को कम करने में सहायक होंगे, साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और संचालन को निर्बाध बनाए रखेंगे। एनएचए देश भर में कार्यबल के कल्याण और राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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