दावोस में विश्‍व आर्थिक मंच में RBI गर्वनर ने कहा, वर्तमान वित्त वर्ष मेें भारत की अर्थव्‍यवस्‍था 7.3 % की दर से बढ़ने की संभावना

दावोस में विश्‍व आर्थिक मंच में RBI गर्वनर ने कहा, वर्तमान वित्त वर्ष मेें भारत की अर्थव्‍यवस्‍था 7.3 % की दर से बढ़ने की संभावना

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बात पर बल दिया है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय-एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में भारत की अर्थव्यवस्था के सात दशमलव तीन प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच-डब्ल्यूईएफ के एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान यह बात कही।

शक्तिकांत दास ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास गति बरकरार रहेगी। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी अनेक इन-हाउस शोध और विश्लेषणों पर आधारित है। शक्तिकांत दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021 में पांच दशमलव आठ प्रतिशत की कमी के बाद, भारतीय अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2022 में नौ दशमलव एक प्रतिशत और वित्त वर्ष 2023 में सात दशमलव दो प्रतिशत की वृद्धि हुई। विशेष रूप से वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी-मुद्रा जारीकर्ता डिफ़ॉल्ट रेटिंग की बीबीबी-माइनस पर पुष्टि की है।

इन्वेस्ट इंडिया द्वारा आयोजित बातचीत में शक्तिकांत दास ने कहा कि मुद्रास्फीति नियंत्रण में आ गई है और या दो से छह प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के लक्ष्य तक लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों को छोड़कर सभी वस्‍तुओं और सेवाओं की मुद्रास्फीति लगातार कम होने लगी है जिससे यह भरोसा हुआ है कि मौद्रिक नीति सही दिशा में काम कर रही है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि निवेशकों के लिए भारत में निवेश करने का यह उपयुक्त समय है।

उन्‍होंने कहा कि रुपये को वैश्विक बनाने की दिशा में भारत के प्रयासों का उद्देश्‍य डॉलर की जगह लेना नहीं है। शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत ने रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण की शुरुआत की है क्योंकि वैश्विक व्यापार के लिए एक मुद्रा पर निर्भरता जोखिम भरी थी। उन्होंने कहा कि डॉलर प्रमुख मुद्रा बना रहेगा।

शक्तिकान्‍त दास ने कहा कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रशासन में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों की नियामक व्‍यवस्‍था को मजबूत किया है।

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