लोकसभा ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (संशोधन) विधेयक 2021 को विस्तृत चर्चा के बाद पारित कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने अपने उत्तर में कहा कि सरकार, भारत को विश्व की फार्मा राजधानी बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। 80 से अधिक देशों में कोविड टीकों और दवाओं के निर्यात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश के लिए गर्व की बात है।
मनसुख मांडविया ने बताया कि अमरीका में उपलब्ध कराई जा रही 40 प्रतिशत से अधिक जेनेरिक दवाएं भारत में ही बनती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी टीकों का 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में बनाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि दो उत्पाद-लिंक्ड प्रोत्साहन योजनाओं को लागू किया जा रहा है, जिससे फार्मा उद्योग को कोविड काल में काफी फायदा हुआ है। मनसुख मांडविया ने सदन को जानकारी दी कि कोविड के खिलाफ डीएनए आधारित टीके का चिकित्सीय परीक्षण पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके अलावा दो अन्य स्वदेशी टीकों का चिकित्सीय परीक्षण जारी है।
विधेयक के संशोधनों का उल्लेख करते हुए डॉक्टर मांडविया ने कहा कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (संशोधन) विधेयक, छोटी फार्मा कम्पनियों को शोध कार्य में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार बेहतर स्वास्थ्य के साथ -साथ देश का विकास कर रही है। डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि आयुष्मान भारत और जनऔषधि योजनाएं स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण को बेहतर बना रही हैं।
विधेयक पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में फार्मेसी का अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक में मूल अधिनियम में दो से तीन संशोधन करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मौजूदा औषधि शिक्षण संस्थानों के अलावा इस विषय पर उच्च शिक्षा देने वाले नए संस्थानों को भी प्रोत्साहित करेगा। नए विधेयक के बारे में जानकारी देते हुए मनसुख मांडविया ने कहा कि मूल अधिनियम में दो-तीन संशोधनों पर विचार किया जा रहा है।
चर्चा की शुरुआत में भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजदीप रॉय ने प्रस्तावित संशोधनों की आवश्यकता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में 12 हजार से अधिक औषधि शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की जरूरत है।
डीएमके सांसद कलानिधि वीरस्वामी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर फार्मेसी क्षेत्र में शीर्ष पर आने के लिए भारत में पर्याप्त प्रतिभाएं हैं। उन्होंने कहा कि कई राष्ट्रीय औषधि शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों को पर्याप्त बुनियादी ढांचे तथा अनुसंधान प्रयोगशालाओं की आवश्यकता है। उन्होंने कंपनियों द्वारा अनुसंधान पर अधिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए पेटेंट का मुद्रीकरण करने का सुझाव दिया।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रोफेसर सौगत राय ने सरकार से फार्मा वैज्ञानिकों को मान्यता देने के साथ ही प्रोत्साहित करने की अपील की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने चिकित्सा तथा स्वास्थ्य क्षेत्रों पर सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि औषधि अनुसंधान के क्षेत्र में केंद्र की सहायता के लिए राज्य सरकारें मिलकर कार्य करेंगी। बहुजन समाज पार्टी के दानिश अली ने कुछ भारतीय फार्मा कंपनियों के सहयोग से बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा मानव परीक्षणों पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही।
इनके अतिरिक्त शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बार्ने, वाईएसआरसीपी के डॉ संजीव कुमार सिंगारी, जनता दल युनाइटेड के डॉ आलोक कुमार सुमन और ऑल इंडिया अन्ना डीएमके पार्टी के पी रवींद्रनाथ ने चर्चा में हिस्सा लिया।