सुप्रीम कोर्ट ने पाक्सो अधिनियम के तहत दुष्कर्म मामले में शारीरिक स्वर्श से सम्बद्ध बम्बई हाई कोर्ट के विवादित फैसले को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने पाक्सो अधिनियम के तहत दुष्कर्म मामले में शारीरिक स्वर्श से सम्बद्ध बम्बई उच्च न्यायालय के विवादित फैसले को रद्द कर दिया है। उच्च न्‍यायालय ने पॉक्‍सो अधिनियम के अनुच्‍छेद-7 के अंतर्गत इसे आवश्यक शर्त माना था।

न्‍यायमूर्ति उदय उमेश ललित, एस रवीन्‍द्र भट्ट और बेला त्रिवेदी की खंडपीठ ने कहा है कि दुष्‍कर्म की नीयत ही अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसी घटनाओं में शारीरिक स्‍पर्श प्रासंगिक नहीं है। खंडपीठ का कहना था कि कानून को उसकी मूल प्रासंगकिता की दृष्टि से परिभाषित किया जाना चाहिए। उसे बचाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।

बॉम्‍बे हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए शीर्ष न्‍यायालय ने दोषी को तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

Related posts

Leave a Comment