Categories: News-Headlines

2030 तक हाइड्रोजन की वैश्विक मांग 200 मिलियन टन तक पहुंचने की संभावना: हरदीप सिंह पुरी

हरित हाइड्रोजन पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीजीएच-2023) का आयोजन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 5-7 जुलाई 2023 तक किया गया, जिसमें भारत और दुनिया के हितधारकों की शानदार उपस्थिति देखी गई। इसमें भारत सरकार ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने और इसे प्रौद्योगिकी, अनुप्रयोगों, नीति और विनियमन में वैश्विक रुझानों के साथ संरेखित करने की कोशिश की गई।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए इस आयोजन पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि इसका आयोजन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के सहयोग से भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा किया गया, जिसमें उद्योग जगत के दिग्गजों की उपस्थिति देखी गई, इसमें 25 विशेषज्ञ सत्रों के माध्यम से विचार-विमर्श किया गया और 1,500 से ज्यादा लोगों ने इन सत्रों में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि यह देखना बहुत संतोषप्रद है कि हम हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो वर्तमान समय की मांग है।

इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ में राज्यमंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव भूपिंदर एस भल्ला; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद; और अमिताभ कांत, भारत के जी-20 शेरपा भी उपस्थित हुए।

हरदीप सिंह पुरी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब एक वैश्विक सहमति बन चुकी है कि हमें नवीकरणीय ऊर्जा में बदलाव लाने की आवश्यकता है। “भारत ने एक नई यात्रा की शुरुआत की है और सभी हितधारकों के बीच सक्रिय समर्थन एवं सहयोग की आवश्यकता है और हाल ही में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के शुभारंभ के साथ, सरकार का उद्देश्य व्यवसाय है।”

पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी कहा कि स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के दृष्टिकोण से भारत चौथे स्थान पर है और इसने सौर एवं पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे कम दीर्घकालिक स्तर वाली लागत प्राप्त की है। उन्होंने कहा, “हरित हाइड्रोजन के उत्पादन में हमें स्वाभाविक लाभ प्राप्त है क्योंकि हमारे पास सौर ऊर्जा की प्रचुरता है और हमारे पावर ग्रिड में निवेश है। हमारे पास हरित हाइड्रोजन के लिए उपयुक्त जलवायु, संसाधन, पर्याप्त उत्पादन और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला मौजूद है।”

हरदीप सिंह पुरी ने स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया में भारत की असीम संभावनाओं पर बात करते हुए कहा कि भारत जलवायु के दृष्टिकोण से समृद्ध है और दुनिया को जीवन के लिए एक बेहतर स्थान बनाने वाली सरकार की अटूट प्रतिबद्धता के साथ, प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने भारत में निवेश करने में अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

पेट्रोलियम मंत्री ने बताया, “यूरोपीय निवेश बैंक (ईआईबी) हमारा हाइड्रोजन सहयोगी होगा और 01 बिलियन यूरो के वित्तपोषण के साथ बड़े स्तर पर उद्योग केंद्र विकसित करने में हमारा सहयोग करेगा। हाल ही में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने हरित विकास के लिए भारत की की सहायता करने के लिए पांच वर्षों में 20- 25 बिलियन डॉलर प्रदान करने के अपने इरादे से अवगत कराया है। इतना ही नहीं, विश्व बैंक ने भारत की कम कार्बन अवस्थांतर यात्रा का समर्थन करने के लिए वित्तपोषण के रूप में 1.5 बिलियन डॉलर की मंजूरी प्रदान की है।”

पेट्रोलियम मंत्री ने भविष्य के ईंधन को वैश्विक मंच पर लाने के लिए सार्वजनिक और निजी कंपनियों को एक साथ लाने के महत्व पर बात करते हुए कहा कि भारत में हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने के रास्तों का पता लगाने के लिए नियमित रूप से उद्योग स्तर पर कई समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। “हम सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र की संस्थाओं दोनों के माध्यम से रिफाइनरियों और सिटी गैस वितरण (सीजीडी) में हरित हाइड्रोजन का उत्थान सुनिश्चित करेंगे और जीवाश्म ईंधन को रणनीतिक रूप से समाप्त करने एवं डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हाइड्रोजन तैनाती की अधिकतम संभावनाओं के साथ नई परियोजनाओं को डिजाइन करने की कोशिश करेंगे।”

हरदीप सिंह पुरी ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को सुचारू बनाने की दिशा में एक बड़ा गेम चेंजर बताया। उन्होंने कहा, “सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने 2030 तक 01 एमएमटी से ज्यादा हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आईईए की रिपोर्ट के अनुसार, हाइड्रोजन की वैश्विक मांग उस समय तक 200 मिलियन टन तक पहुंचने की संभावना है।”

इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ में राज्यमंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने उपस्थित सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हाइड्रोजन मिशन न केवल रोजगार सृजित करेगा बल्कि वैश्विक व्यापार को भी बढ़ावा देगा और आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा। उन्होंने तीन मंत्रों सामर्थ्य, सुलभता और स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला।

Leave a Comment

Recent Posts

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुई दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुई दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया… Read More

2 hours ago

संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण हेतु संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका

लोकसभा में कल संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक… Read More

2 hours ago

विधानसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग ने 865 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की

निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 865 करोड़ रुपये… Read More

2 hours ago

आईपीएल में गुजरात टाइटंस ने कोलकाता नाईट राइडर्स को पांच विकेट से हराया

आईपीएल क्रिकेट में कल रात अहमदाबाद में गुजरात टाइटंस ने कोलकाता नाईट राइडर्स को पांच… Read More

2 hours ago

MSME मंत्रालय ने डेटा-ड्रिवन लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए NICDC लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज के साथ एमओयू साइन किया

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने और इस क्षेत्र के लिए… Read More

15 hours ago

This website uses cookies.