सरकार ने मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया मंचो को राम मंदिर कार्यक्रम से संबंधित झूठी, अपुष्ट और हेरफेर की गई सामग्री प्रकाशित ना करने की सलाह दी है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अपने परामर्श में कहा कि यह देखा गया है कि कुछ असत्यापित, उत्तेजक और फर्जी संदेश फैलाए जा रहे हैं, विशेषकर सोशल मीडिया पर, जो सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ सकते हैं।
परामर्श में प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के तहत भारतीय प्रेस परिषद द्वारा निर्धारित पत्रकारिता आचरण के मानदंडों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। समाचार पत्रों को ऐसे किसी भी समाचार, टिप्पणी या जानकारी को प्रस्तुत करने में उचित संयम और सावधानी बरतनी चाहिए जिनसे राज्य और समाज के सर्वोपरि हितों या व्यक्तियों के अधिकारों को नुकसान पहुंचने की संभावना हो।
मंत्रालय ने कहा है कि समाचार पत्रों, निजी उपग्रह टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया पर समाचार और समसामयिक मामलों के प्रकाशकों को ऐसी किसी भी सामग्री के प्रकाशित या प्रसारण से बचना चाहिए जो फर्जी हो या देश में सांप्रदायिक सद्भाव या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने की क्षमता रखती हो।