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सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए कई प्रमुख गतिविधियों को प्राथमिकता दी

भारत सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए कई प्रमुख गतिविधियों को प्राथमिकता दी है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण शासन उपकरण के रूप में ‘पोषण ट्रैकर’ आईसीटी एप्लिकेशन को विकसित और तैनात किया है। आज तक, 13.96 लाख (1.396 मिलियन) से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र एप्लिकेशन पर पंजीकृत हैं, जिससे 10.3 करोड़ (103 मिलियन) से अधिक लाभार्थी लाभान्वित हुए हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और किशोर बालिकाएं सम्मिलित हैं। पोषण ट्रैकर में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की विस्तारित तालिकाओं को शामिल किया गया है, जो बच्चे की ऊंचाई, वजन, लिंग और उम्र के आधार पर स्टंटिंग, वेस्टिंग, कम वजन और मोटापे की स्थिति को गतिशील रूप से निर्धारित करने के लिए दिन-आधारित जेड-स्कोर प्रदान करते हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों में विकास मापदंडों को मापने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जिला स्तर पर और विश्व बैंक, बिल मिलिंडा और गेट्स फाउंडेशन आदि के माध्यम से चिकित्सा पेशेवरों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, जिसके लिए देश के प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में विकास मापने के उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और विश्व बैंक जैसे कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पोषण ट्रैकर को पोषण के क्षेत्र में गेम-चेंजर के रूप में स्वीकार किया है। विश्व बैंक और यूनिसेफ ने पोषण ट्रैकर के संचालन में सहायता के लिए मंत्रालय के साथ मिलकर सहयोग किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पोषण ट्रैकर को पोषण पर नियमित प्रशासनिक डेटा को त्रुटिहीन रूप से एकत्र करने के लिए एक अनुकरणीय मंच के रूप में मान्यता प्रदान की है। भारत की जी-20 अध्यक्षता के अंतर्गत, सदस्य राज्यों ने भारत के पोषण ट्रैकर पर ध्यान दिया, जो अद्वितीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म वास्तविक समय की निगरानी और लक्षित हस्तक्षेप के लिए नीतियों को सक्षम करने के लिए डेटा को डिजिटल बनाने का प्रयास करता है।

अप्रैल 2023 से, पोषण ट्रैकर पर अपलोड किए गए 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का माप डेटा लगातार बढ़ा है। यह डेटा अप्रैल 2023 में 6.34 करोड़ (63.4 मिलियन) से सितंबर 2023 में 7.24 करोड़ (72.4 मिलियन) हो गया। वैश्विक भूख सूचकांक 2023 में चाइल्ड वेस्टिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले 18.7 प्रतिशत के मूल्य की तुलना में पोषण ट्रैकर, महीने-दर-महीने लगातार 7.2 प्रतिशत से नीचे रहा है।

वैश्विक भूख सूचकांक ‘भूख’ का एक त्रुटिपूर्ण मापक बना हुआ है और यह भारत की वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करता है। आयरलैंड और जर्मनी के गैर-सरकारी संगठनों, कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्ट हंगर हिल्फे द्वारा जारी वैश्विक भूख रिपोर्ट 2023 में 125 देशों में भारत को 111वां स्थान दिया गया है। सूचकांक भूख का एक गलत माप है और गंभीर प्रणाली संबंधी मुद्दों से ग्रस्त है। सूचकांक की गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले चार संकेतकों में से तीन बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित हैं और पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं। चौथा और सबसे महत्वपूर्ण संकेतक ‘कुपोषित (पीओयू) जनसंख्या का अनुपात’ 3000 के बहुत छोटे नमूना आकार पर किए गए एक जनमत सर्वेक्षण पर आधारित है।

खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा जारी “विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति 2023 (एसओएफआई 2023)” रिपोर्ट में भारत के लिए पीओयू 16.6 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया है। खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) का अनुमान गैलप वर्ल्ड पोल के माध्यम से किए गए “खाद्य असुरक्षा अनुभव स्केल (एफआईईएस)” सर्वेक्षण पर आधारित है, जो “3000 उत्तरदाताओं” के नमूना आकार के साथ “8 प्रश्नों” पर आधारित एक “जनमत सर्वेक्षण” है। खाद्य असुरक्षा अनुभव स्केल (एफआईईएस) के माध्यम से भारत के आकार के एक देश के लिए एक छोटे से नमूने से एकत्र किए गए डेटा का उपयोग भारत के लिए पीओयू मूल्य की गणना करने के लिए किया गया है जो न केवल गलत और अनैतिक है, बल्कि इसमें स्पष्ट पूर्वाग्रह का भी इशारा करती है।

इन कमियों के कारण, खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) को खाद्य असुरक्षा अनुभव स्केल (एफआईईएस) सर्वेक्षण डेटा के आधार पर ऐसे अनुमानों का उपयोग नहीं करने के लिए कहा गया था। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय और खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के परामर्श से खाद्य असुरक्षा अनुभव स्केल (एफआईईएस) पर एक प्रायोगिक सर्वेक्षण की योजना बनाई है। इस उद्देश्य के लिए गठित तकनीकी समूह ने प्रश्नावली, नमूना डिजाइन और नमूना आकार सहित मौजूदा खाद्य असुरक्षा अनुभव स्केल (एफआईईएस) मॉड्यूल में बदलाव का सुझाव दिया है। हालाँकि, प्रायोगिक सर्वेक्षण प्रक्रिया में होने के बावजूद, खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के खाद्य असुरक्षा अनुभव स्केल (एफआईईएस) आधारित पीओयू अनुमान का निरंतर उपयोग खेदजनक है।

दो अन्य संकेतक, अर्थात् स्टंटिंग और वेस्टिंग, भूख के अलावा स्वच्छता, आनुवंशिकी, पर्यावरण और भोजन सेवन के उपयोग जैसे विभिन्न अन्य कारकों की जटिल बातचीत के परिणाम हैं, जिन्हें जीएचआई में स्टंटिंग और वेस्टिंग के लिए प्रेरक/परिणाम कारक के रूप में लिया जाता है। इसके अलावा, इस बात का शायद ही कोई सबूत है कि चौथा संकेतक, अर्थात् बाल मृत्यु दर भूख का परिणाम है।

केंद्र सरकार ने देश में कोविड-19 के प्रकोप के कारण उत्पन्न आर्थिक बाधाओं के कारण गरीबों और जरूरतमंदों को होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के विशिष्ट उद्देश्य से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) शुरू की। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के अंतर्गत मुफ्त खाद्यान्न का आवंटन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के अंतर्गत किए गए सामान्य आवंटन के अतिरिक्त था। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के अंतर्गत लगभग 1118 लाख मीट्रिक टन (111.8 मिलियन मीट्रिक टन) खाद्यान्न की कुल मात्रा आवंटित की गई थी। वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23 के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के (चरण I-VII) लगभग 3.91 लाख करोड़ (3910 अरब रुपये) के नियोजित वित्तीय परिव्यय के साथ 28 महीने की अवधि के लिए निर्धारित किया गया था, जिससे लगभग 80 करोड़ (800 मिलियन) व्यक्तियों को लाभ हुआ। 1 जनवरी 2023 से शुरू होकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के तहत एएवाई (अंत्योदय अन्न योजना) परिवारों और पीएचएच (प्राथमिकता वाले परिवार) लाभार्थियों को लगभग रु. 2 लाख करोड़ (2000 अरब रुपये) आवंटित किए गए। यह दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है।

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