संसद के दोनों सदनों में मणिपुर हिंसा को लेकर आज दूसरे दिन भी कार्यवाही बाधित हुई। लोकसभा सोमवार तक और राज्यसभा को दिन में ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में आज सुबह कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, डीएमके, जनता दल युनाइटेड और अन्य दलों ने इस मुद्दे पर नारेबाजी की और सदन के बीचो बीच पहुंच गए। शोर शराबे के बीच रक्षा मंत्री ने कहा कि विपक्ष इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है और चर्चा नहीं करना चाहता है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है और सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह चर्चा के लिए तैयार है। अध्यक्ष ओम बिडला ने सदन चलाने का बार-बार आग्रह किया लेकिन विरोध कर रहे सदस्यों ने हंगामा जारी रखा। इस बीच सत्ता पक्ष ने भी जवाबी नारे लगाए। इसके बाद में सदन को 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
उधर, राज्यसभा में सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए समय के आवंटन के संबंध में कार्य सलाहकार समिति के निर्णयों की घोषणा की। इस पर आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह विधेयक असंवैधानिक है। भारत राष्ट्र समिति के केशव राव ने कहा कि यह मामला विचाराधीन है और इसे सदन में नहीं उठाया जाना चाहिए। हालांकि सभापति ने इस तर्क पर असहमति व्यक्त की।
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने मणिपुर हिंसा का मुद्दा उठाने की कोशिश की। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने सदन में कल की कार्यवाही से मणिपुर हिंसा से संबंधित कुछ शब्दों को हटाने पर आपत्ति जताई। इसके बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, डीएमके और अन्य विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबा किया। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी जवाबी नारे लगाए। सभापति ने सदन में व्यवस्था बनाये रखने का आग्रह किया। लेकिन हंगामा जारी रहने पर सदन को दिन में ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।