बिहार सरकार ने लोक सेवा आयोग – बीपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा में डोमेसाइल संबंधी नियमों को शिथिल करने और दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देने के अपने फैसले को सही ठहराया है।
बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने आज पटना में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि संविधान के अनुच्छेद सोलह के अनुसार किसी भी परीक्षा में जन्म और निवास के आधार पर देश के नागरिक को वंचित नहीं किया जा सकता है। इस आधार पर किसी उम्मीदवार के साथ कोई भी भेदभाव भी नहीं किया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा में चयन मेधा के आधार पर होता है। आमिर सुबहानी ने कहा कि बिहार लोक सेवा आयोग – बी पी एस सी ने 1994, 1999 और 2000 में आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में देश भर से उम्मीदवारों ने आवेदन दिये थे। उसमें भी कोई डोमेसाइल नीति नहीं लागू थी।
आमिर सुबहानी ने कहा कि बिहार शिक्षक भर्ती नियमावली में संशोधन संविधान के प्रावधानों के अनुरुप है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी यही प्रावधान लागू है। गौरतलब है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में बिहार से बाहर के उम्मीदवारों को आवेदन की छूट देने का राज्य के शिक्षक अभ्यर्थी विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बिहार के अभ्यर्थियों का हित इससे प्रभावित होगा। भाजपा ने भी अभ्यर्थियों की मांग का समर्थन किया है।