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वितरण कम्पनियों (डीआईएससीओएमएस)/राज्यों को आवश्यकता आकलन के आधार पर स्वयं की डीपीआर तैयार करने का अधिकार: विद्युत मंत्री

केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने आज चार अलग-अलग सत्रों में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा/विद्युत मंत्रियों/ सलाहकारों के साथ क्षेत्रीय स्तर की बैठकों की एक श्रृंखला शुरू की और उनसे वितरण क्षेत्र योजना से जुड़े नए सुधारों पर चर्चा की ।

आर के सिंह ने मंत्रियों को स्पष्ट रूप से बताया कि बिजली की बढ़ती मांग के कारण वितरण ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि अब इस योजना को बॉटम-अप योजना के रूप में तैयार किया गया है और वितरण कम्पनियों (डीआईएससीओएमएस) /राज्यों को नुकसान कम करने के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए अपनी जरूरत के आकलन के आधार पर अपनी डीपीआर तैयार करने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत वितरण कंपनियों द्वारा व्यवस्था सुधारने, उप-केन्द्रों (सबस्टेशनों)का नवीनीकरण और आधुनिकीकरण आदि जैसे आधुनिकीकरण कार्य भी किए जा सकते हैं।

राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों ने बिजली क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे समय सीमा के अनुसार अपनी योजना तैयार कर रहे हैं। माननीय केंद्रीय मंत्री ने सलाह दी कि उनकी योजना प्रणाली की कमजोरियों को दूर करने के लिए होनी चाहिए और उस योजना की बढ़ती मांगों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजना में यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि आने वाले 10 वर्षों में कितनी मांग होगी और तदनुसार ही इसे पूरा करने के लिए अपनी प्रणाली तैयार करें। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रणाली को आधुनिक बनाने की जरूरत है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि वह और उनके अधिकारी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों और अधिकारियों से भी मिलेंगे और साथ बैठकर उनकी योजना तैयार करवाएंगे।

आर के सिंह ने रेखांकित किया कि योजना के तहत वितरण कंपनियों के परिचालन और वित्तीय सुधार में प्रगति के आधार पर वित्तीय आबंटन जारी किए जाएंगे। उन्होंने विस्तार से बताया कि वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा नुकसान में कमी लाना कोई मुश्किल काम नहीं है और घाटे को कम करने के लिए, उन्हें (i) बिल तैयार करने की दक्षता में सुधार (ii) संग्रह क्षमता में वृद्धि (iii) सरकारी विभागों द्वारा बिजली की खपत के लिए समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता, के साथ ही (iv) आपूर्ति की वास्तविक लागत और यदि राज्य सरकारें कम दरों पर बिजली देना चाहती हैं तो सब्सिडी का समय पर भुगतान करने के लिए दर (टैरिफ) का निर्धारण करना।

मंत्री महोदय ने योजना के एक अन्य महत्वपूर्ण तत्व पर भी प्रकाश डाला, जिसमें सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों, अमृत शहरों, सभी केंद्र शासित प्रदेशों, अधिक नुकसान वाले क्षेत्रों, कृषि उपभोक्ताओं के अलावा वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को सकल परिव्यय प्रारूप (टीओटीईएक्स मोड) में 10 करोड़ स्मार्ट मीटर देने की प्राथमिकता की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पर्याप्त धन उपलब्ध है और योजना तथा कार्यान्वयन में ईमानदारी के साथ, देश के नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक परिचालनगत कुशल और वित्तीय रूप से टिकाऊ बिजली वितरण क्षेत्र विकसित किया जा सकता है।

आर के सिंह ने मंत्रियों से अपने-अपने राज्यों को कृषि फीडरों का सौर ऊर्जाकरण करने (सोलराइजेशन) के लिए प्रधानमंत्री (पीएम) -कुसुम योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। कृषि फीडरों के सौर ऊर्जाकरण (सोलराइजेशन) से किसानों को पहले दिन से ही मुफ्त या बहुत कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे राज्यों को कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत के लिए उनके द्वारा भुगतान की जा रही सब्सिडी की भारी राशि की भी बचत होगी। इसके अलावा, छत पर सौर पैनल (रूफटॉप सोलर) को भी पर्यावरण के अनुकूल तरीके की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

बैठक में विद्युत राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, विद्युत मंत्रालय के सचिव और विद्युत वित्त निगम (पीएफसी) एवं ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक भी उपस्थित थे।

3,03,758 करोड़ रुपये के परिव्यय और 97,631 करोड़ रुपये के केंद्र सरकार से अनुमानित सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) के साथ सुधार-आधारित और परिणाम-से जुडी हुई पुर्नोत्थान (रिवैम्प्ड) वितरण क्षेत्र योजना शुरू की गई है। नेटवर्क सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण, वित्तीय व्यवहार्यता और बढ़ी हुई उपभोक्ता सेवा और सुविधा इस योजना के प्रमुख पहलू हैं।

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