लोकसभा में आज 2023-24 के केंद्रीय बजट पर फिर चर्चा शुरू हुई। चर्चा में भाग लेते हुए, वाईएसआर कांग्रेस के सांसद भरत राम मार्गानी ने इसे विस्तृत बजट बताया। उन्होने कहा कि विश्वव्यापी आर्थिक संकट के इस दौर में ऐसा बजट पेश करने के लिए सरकार की सराहना होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से राज्य में पेट्रो-रसायन परिसरों की स्थापना के लिए धन आवंटित करने के अलावा आंध्र प्रदेश के लिए एक मेट्रो रेल परियोजना को मंजूरी देने का आग्रह किया। उन्होंने सरकार से 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम को लागू करने के लिए भी कहा।
तृणमूल कांग्रेस के प्रोफेसर सौगत रे ने कहा कि बजट में इस बात का जिक्र नहीं है कि बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी जैसे मुद्दों से कैसे निपटा जाए। उन्होंने बजट को अवसरवादी बताते हुए कहा कि इसमें भविष्यवादी दृष्टिकोण का अभाव है।
तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कोई नई योजना नहीं है। उन्होंने बजट को अवसरवादी और जनविरोधी बताया और दावा किया कि इसे समावेशी बजट नहीं कहा जा सकता।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एएम आरिफ का कहना था कि कोविड-19 महामारी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में काम बढ़ गया है, लेकिन बजट में मनरेगा के लिए प्रावधान में कमी कर दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बजट किसानों के हित के में नहीं है।
नेशनल कांफ्रेंस के हसनैन मसूदी ने कहा कि बजट 2023-24 में मध्यान्ह भोजन योजना, आईसीडीएस, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि के लिए धन का आवंटन कम कर किया गया है। उनका कहना था कि देश की आबादी में एक तिहाई हिस्सा बच्चों का हैं, इसलिए उनसे संबंधित कल्याण के लिए बजट में ज्यादा से ज्यादा प्रावधान होना चाहिए।