लोकसभा ने आज 2022-23 के लिए पूरक अनुदान मांगों और 2019-20 के लिए अतिरिक्त अनुदान की मांगों को पारित कर दिया। पूरक अनुदान मांगों के तहत सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष में लगभग चार लाख 36 हजार करोड़ रूपये मूल्य के अतिरिक्त कुल व्यय का प्रस्ताव किया है। इसमें तीन लाख 25 हजार करोड़ रूपये से अधिक का नकद औसत व्यय और कुल अतिरिक्त व्यय शामिल है, जो मंत्रालयों और विभागों की बचत या एक लाख दस हजार करोड़ रूपये से अधिक औसत की बढ़ी हुई प्राप्ति के समान है। एक लाख नौ हजार करोड़ रूपये की अधिकतम राशि ऊर्वरकों की सब्सिडी के खर्च के लिए होगी। पहले बैच के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत खाद्य सब्सिडी और अतिरिक्त आबंटन के लिए लगभग 80 हजार तीन सौ 48 करोड़ रूपये अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति अपेक्षित है।
लोकसभा में पूरक अनुदान मांगों पर चर्चा का जबाव देते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन ने जोर देकर कहा कि देश में मुद्रास्फीति में लगातार कमी आ रही है, जिससे गरीबों को राहत मिली है और थोक मूल्य सूचकांक में पांच दशमलव 8 प्रतिशत की कमी आयी है जो कि पिछले 21 महीनों सबसे कम है। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यक वस्तुओं के मूल्य स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष नवम्बर में मुद्रास्फीति दो अंकों में थी जो कम होकर पांच दशमलव आठ प्रतिशत हो गयी है। उन्होंने कहा कि देश में मूल्य स्थिरता के लिए दालों का बफर भंडार बनाकर रखा गया है। उन्होंने दोहराया कि भारतीय रूपया अन्य मुद्राओं के मुकाबले मजबूत है। पूरक अनुदान मांगों पर वित्त मंत्री ने बताया कि वर्तमान बजट अनुमान का केवल आठ प्रतिशत है और इसका प्रमुख भाग ऊर्वरकों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा उज्जवला योजना के लिए है।
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