देश के सबसे अमीर उद्यमी गौतम अडाणी ने मंगलवार को कहा कि अडाणी समूह भारत में निवेश से न तो कभी पीछे हटा है और न ही कभी निवेश को धीमा किया है क्योंकि समूह अपनी वृद्धि को देश की आर्थिक प्रगति से जोड़कर देखता है।
अडाणी ने अपने समूह की कंपनियों के शेयरधारकों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नए ऊर्जा कारोबार में 70 अरब डॉलर के निवेश की पहले की गई घोषणा से भारत को कच्चे तेल के आयातक की जगह हरित हाइड्रोजन का निर्यातक बनाने में मदद मिलेगी।
अडाणी समूह के मुखिया ने कहा, “भविष्य में हमारे भरोसे एवं यकीन को दर्शाने वाला सबसे अच्छा सबूत भारत के हरित बदलाव को संभव बनाने के लिए किया जाने वाला 70 अरब डॉलर का हमारा निवेश है।”
समूह की नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) वर्ष 2030 तक 45 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना चाहती है। इसके लिए वह हर साल दो गीगावाट सौर क्षमता विकसित करने के लिए 20 अरब डॉलर का निवेश कर रही है। बाकी राशि का इस्तेमाल हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए विनिर्माण सुविधाएं बनाने में किया जाएगा।
अडाणी ने कहा, “नवीकरणीय ऊर्जा में हमारी ताकत हमें हरित हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बनाने में समर्थन देगी। हम भारत को तेल एवं गैस के आयात पर अत्यधिक निर्भर देश से स्वच्छ ऊर्जा के शुद्ध निर्यातक देश में बदलने की पहल में सबसे आगे हैं।”
उन्होंने कहा कि अडाणी समूह की सफलता भारत की विकास गाथा के साथ तालमेल पर आधारित है। अडाणी ने कहा, “हमने कभी भी भारत में अपने निवेश को न तो धीमा किया है और न ही निवेश से अपने कदम पीछे खींचे हैं।”
अडाणी ने कहा कि समूह ‘भारत के बुनियादी ढांचे के निर्माता’ के रूप में विकसित हो रहा है जो बड़े सड़क निर्माण अनुबंध हासिल कर रहा है और बंदरगाहों एवं लॉजिस्टिक से लेकर बिजली पारेषण एवं वितरण और शहरी गैस आपूर्ति तक के कारोबार का विस्तार कर रहा है।
उन्होंने कहा, “यह निकटता पर आधारित हमारे कारोबारी मॉडल का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके अलावा हमने डेटा सेंटर, डिजिटल सुपर ऐप और औद्योगिक क्लाउड से लेकर रक्षा और वैमानिकी, धातु और सामग्री तक के क्षेत्रों में भी मौजूदगी दर्ज कराई है।”
अडाणी ने कहा कि उनका समूह देश में हवाईअड्डों का सबसे बड़ा परिचालक बनकर उभरा है और होल्सिम के अधिग्रहण के साथ समूह ने अब सीमेंट कारोबार में भी अपने कदम रख दिए हैं। इसके अलावा अडाणी समूह 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में भी बोली लगा रहा है।
अडाणी समूह की शुरुआत वर्ष 1988 में जिंस कारोबार के साथ हुई थी। धीरे-धीरे यह समुद्री बंदरगाह, कोयला, ऊर्जा वितरण, हवाईअड्डा, डेटा केंद्र और सीमेंट और तांबे के उत्पादन में भी उतर चुका है।
उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि हमारे कारोबार का पैमाना, कारोबार की विविधता और हमारा पिछला प्रदर्शन हमें बाजार की विभिन्न स्थितियों में अच्छा प्रदर्शन जारी रखने के लिए बहुत मजबूत स्थिति में रखता है।”
उन्होंने कहा, “हमारे विकास और सफलता को दुनिया भर में मान्यता मिली है। कई विदेशी सरकारें अब अपने भौगोलिक क्षेत्रों में काम करने और अपने बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद करने के लिए हमसे संपर्क कर रही हैं।” हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।
अडाणी ने कहा, “अपने सभी पोर्टफोलियो में परिचालन उत्कृष्टता पर ध्यान देने और अभिवृद्धि क्षमता में बढ़ोतरी ने एबिटा आय को 26 प्रतिशत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। हमारे पोर्टफोलियो की एबिटा आय 42,623 करोड़ रुपये रही।”
अडाणी समूह की छह सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण इस साल 200 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।
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