बिहार में जाति आधारित गणना को लेकर आज पांचवें दिन भी पटना हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस महीने की 3 तारीख को पटना उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई शुरू हुई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के जाति आधारित गणना को करवाने के अधिकार तथा वैधानिकता को लेकर पक्ष और विपक्ष की ओर कई तर्क दिए गए हैं।
राज्य सरकार के महाधिवक्ता प्रशांत कुमार शाही ने कहा कि जाति की गणना और उनके आर्थिक सामाजिक स्थिति का अध्ययन करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।
राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए महाधिवक्ता ने कहा कि अब तक जाति आधारित गणना का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने जाति आधारित गणना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस वर्ष 4 मई को गणना कार्य पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी थी। न्यायालय का कहना था कि प्राथमिक तौर पर यह लगता है कि जाति गणना की आड़ में जनगणना की जा रही है जिसका राज्य सरकार को कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। उच्च न्यायालय कहा था कि जाति आधारित जनगणना करवाना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
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