प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 21वीं सदी का भारत विश्व को यह संदेश दे रहा है कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी आपस में टकराने वाले क्षेत्र नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि देश की आर्थिक प्रगति पर्यावरण के संरक्षण के साथ भी हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक तरफ तो भारत विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है और दूसरी तरफ देश का वन क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कल मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते छोड़ने के बाद यह बात कही।
ये प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण होता है, तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित होता है। विकास और समृद्धि के रास्ते भी खुलते हैं। कूनो नेशनल पार्क में जब चीता फिर से दौड़ेंगे, तो यहां का ग्रास लैण्ड इको सिस्टम फिर से रिस्टोर होगा। बायो-डायवर्सिटी और बढ़ेगी। आने वाले दिनों में यहां इको टूरिज्म भी बढ़ेगा। यहां विकास की नई संभावनाएं जन्म लेंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चीतों को 1952 में भारत में विलुप्त घोषित किया गया था और करीब सात दशक तक उनके पुनर्वास के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया।
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