पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के कारण मार्ग और पारगमन के तरीकों में बदलाव सहित समुद्री रसद को लेकर चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं। इनका प्रभाव इस क्षेत्र में या इसके माध्यम से जाने वाले निर्यात माल के लिए रसद लागत और जहाजों के परिवहन कार्यक्रम पर पड़ा है।
बदलती भूराजनीतिक स्थिति और समुद्री व्यापार पर इसके प्रभावों को देखते हुए, भारत सरकार ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (आरओडीटीईपी) योजना के अंतर्गत सभी पात्र निर्यात उत्पादों के लिए दरों और मूल्य सीमाओं को 23 मार्च, 2026 से बहाल करने का निर्णय लिया है।
पुनः लागू की गई दरें वे होंगी जो 22 फरवरी, 2026 को लागू थीं, जिससे अधिसूचना संख्या 60/2025-26 दिनांक 23 फरवरी, 2026 के माध्यम से लगाई गई 50 प्रतिशत की पूर्व की पाबंदी वापस ले ली जाएगी।
यह अधिसूचना दिनांक 23 फरवरी, 2026 की उपरोक्त अधिसूचना और दिनांक 24 फरवरी, 2026 के शुद्धिपत्र को निरस्त करती है, सिवाय उन कार्रवाइयों के जो इस निरस्तीकरण से पहले ही की जा चुकी हैं।
इस कदम का उद्देश्य खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री मार्ग में व्यवधानों के कारण बढ़ी हुई माल ढुलाई लागत और युद्ध संबंधी व्यापार जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को समय पर सहायता प्रदान करना है।
यह निर्णय निर्यातकों के लिए एक स्थिर, उत्तरदायी और सहायक नीतिगत वातावरण सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि इन चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।
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