केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि नई गृह निर्माण प्रौद्योगिकियां 2047 में, जब भारत अपनी आजादी के 100 साल मनाएगा, भारत के भव्य भवनों को आकार देंगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई दिल्ली में सीएसआईआर-सीबीआरआई प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मेले को संबोधित करते हुए, कहा, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) ने विश्व स्तरीय और अत्याधुनिक भवन निर्माण प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं, जो न केवल मजबूत हैं और जलवायु और सूखे के अनुकूल बल्कि वैश्विक पर्यावरण मानदंडों के अनुरूप भी हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश भर में 37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में से प्रत्येक की अनूठी प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए पिछले साल उनके द्वारा आयोजित वन-वीक वन लैब कार्यक्रम की परिकल्पना और उद्घाटन किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, क्योंकि सीएसआईआर-सीबीआरआई ने एक स्लॉट में 75 भवन और निर्माण प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया और उन्हें उद्योगों को हस्तांतरित कर दिया। आने वाले दिनों में उद्योगों को सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती भवन निर्माण के लिए ऐसी 108 प्रौद्योगिकियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे प्राथमिकता वाली स्कीम प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के लिए प्रौद्योगिकी प्रदाता के रूप में मुख्य आधार बनने के लिए सीबीआरआई की सराहना की। डॉ. सिंह ने उपस्थित जनसमूह को याद दिलाया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया था कि कोई भी भारतीय कच्चे घर में नहीं रहेगा और सभी पात्र लाभार्थियों के पास शौचालय और प्रकाश सुविधाओं के साथ पक्की छत होगी। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में पीएमएवाई घरों में रहने वाले गरीब लाभार्थियों के चेहरे पर मुस्कान देखकर उन्हें प्रसन्नता हो रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने फोल्डेबल साल्ट शेल्टर, जो मौसम और आग प्रतिरोधी है, विकसित करने के लिए सीबीआरआई की सराहना की और कहा कि इसके व्यापक सामाजिक प्रभाव होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लगभग सभी सुधारों और नवोन्मेषण और पहलों का सामाजिक आधार है और उनका उद्देश्य आम आदमी के लिए “जीवनयापन को सुगम बनाना” है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उल्लेखनीय उपलब्धि सीएसआईआर-सीबीआरआई, रूडकी के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के समर्पण और विशेषज्ञता का प्रमाण है और बताया कि निर्माण प्रौद्योगिकियां व्यक्तियों और समुदायों के जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रौद्योगिकियों में मनुष्यों की जीवन स्थितियों को बदलने, स्थिरता बढ़ाने और लोगों की समग्र भलाई में सुधार करने की शक्ति है। डॉ. सिंह ने कहा कि अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच अंतर को पाटकर, सीएसआईआर-सीबीआरआई रूडकी ने सभी के लिए किफायती, टिकाऊ और नवीन आवास के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आवास क्षेत्र में आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे बहुआयामी हैं, जिनमें सामर्थ्य और स्थिरता से लेकर आपदा लचीलापन और ऊर्जा दक्षता तक शामिल हैं। हालांकि, आज हमारे पास जो विशेषज्ञता और ज्ञान है, उससे मुझे विश्वास है कि हम देश में इन चुनौतियों से निपट सकते हैं और ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं जहां हर व्यक्ति को सुरक्षित और आरामदायक आवास की सुविधा उपलब्ध हो।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत के सभी अग्रणी व्यक्तियों और प्रतिनिधियों से इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने और देश में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपनी क्षमता का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन प्रगतियों को सर्वोत्तम प्रथाओं में शामिल करके, न केवल प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है, बल्कि समाज की भलाई में महत्वपूर्ण योगदान भी दिया जा सकता है।
डीएसआईआर के सचिव एवं सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 77 वर्षों में निरंतर अनुसंधान और विकास के माध्यम से, सीएसआईआर-सीबीआरआई रूडकी आवास प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, प्रतिभाशाली व्यक्तियों द्वारा की गई कई प्रगतियों ने न केवल निर्माण उद्योग में क्रांति आई, बल्कि इसने अनगिनत व्यक्तियों के जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला। उन्होंने कहा कि कुछ उल्लेखनीय प्रौद्योगिकियां अंडर-रीम्ड पाइल्स, अपशिष्ट से धन, पूर्व फैब्रीकेटेड आवास, अग्नि सुरक्षा, पेड़ों के बिना लकड़ी, सुरक्षात्मक कोटिंग्स और आज स्थानांतरित की जा रही प्रौद्यगिकी हैं।
सीबीआरआई के निदेशक प्रदीप कुमार ने कहा कि यह बताते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है कि सीएसआईआर-सीबीआरआई ने सामाजिक लाभ की परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है और पीएमएवाई-जी के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय मिशन “सभी के लिए आवास” में व्यापक स्तर पर योगदान दिया है। संस्थान ने ग्रामीण भवनों के समावेशी विकास के लिए ग्रामीण आवास टाइपोलॉजी संग्रह “पहल” विकसित की है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने टेक्नोलॉजी कम्पेंडियम भी जारी किया, जो दो खंडों में विभिन्न टिकाऊ और किफायती प्रौद्योगिकियों के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका है, जिसमें भवन निर्माण विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी तरीके से विकसित वर्तमान उन्नत प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ समय-सिद्ध प्रौद्योगिकियों को शामिल किया गया है।
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