चीनी क्षेत्र में भारत के किसी भी मौजूदा और चल रहे नीतिगत उपायों पर चीनी पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) पैनल के निष्कर्षों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं और अपने किसानों के हितों को सुरक्षित करने के लिए इस रिपोर्ट के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में अपील दायर कर रखी है।
यह ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 2019 में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और ग्वाटेमाला ने डब्ल्यूटीओ में चीनी क्षेत्र में भारत के कुछ नीतिगत उपायों को चुनौती दी थी। उन्होंने गलत तरीके से दावा किया था कि गन्ना उत्पादकों को भारत द्वारा प्रदान की जाने वाली घरेलू सहायता डब्ल्यूटीओ द्वारा अनुमत सीमा से अधिक है और भारत चीनी मिलों को निषिद्ध निर्यात सब्सिडी प्रदान करता है।
पैनल ने 14 दिसंबर 2021 को अपनी रिपोर्ट जारी की, जिसमें उसने गन्ना उत्पादकों और निर्यात को समर्थन देने के लिए भारत की योजनाओं के बारे में कुछ गलत निष्कर्ष निकाले हैं।
पैनल के निष्कर्ष भारत को पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। पैनल के निष्कर्ष तर्कहीन हैं और डब्ल्यूटीओ के नियम इनका समर्थन नहीं करते। पैनल ने उन प्रमुख मुद्दों को भी टाल दिया है, जिन्हें निर्धारित करने के लिए वह बाध्य था। इसी तरह, कथित निर्यात सब्सिडी पर पैनल के निष्कर्ष तर्क और औचित्य को कमजोर बनाते हैं।
भारत का मानना है कि ये उपाय डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत उसके दायित्वों के अनुरूप हैं।
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