केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में असम की क्षेत्रीय अखंडता को सुनिश्चित करने वाले दशकों पुराने संकट को समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक कार्बी आंगलोंग समझौते पर आज नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए। इस अवसर पर हिमंता बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री असम, सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री व आयुष मंत्री, नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, तुलीराम रोंगहांग, मुख्य कार्यकारी सदस्य के.ए.ए.सी., कार्बी लोंगरी नॉर्थ कछार हिल्स लिबरेशन फ्रंट/के.एल.एन.एल.एफ., पीपुल्स डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लोंगरी/पी.डी.सी.के., यूनाइटेड पीपुल्स लिबरेशन आर्मी/यू.पी.एल.ए., कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर्स/के.पी.एल.टी. गुटों के प्रतिनिधियों सहित केंद्रीय गृह मंत्रालय और असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
इस ऐतिहासिक समझौते के फलस्वरूप, 1000 से अधिक सशस्त्र कैडर हिंसा का त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। कार्बी क्षेत्रों में विशेष विकास परियोजनाओं को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार और असम सरकार द्वारा पांच वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये का एक विशेष विकास पैकेज दिया जाएगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कार्बी समझौता – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “उग्रवाद मुक्त समृद्ध पूर्वोत्तर” के दृष्टिकोण (विज़न) में एक और मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि ये समझौता असम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। अमित शाह ने कहा कि जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब से पूर्वोत्तर प्रधानमंत्री जी का ना सिर्फ़ फ़ोकस का क्षेत्र रहा है, बल्कि नॉर्थ ईस्ट का सर्वांगीण विकास और वहां शांति और समृद्धि मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
अमित शाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार की नीति है कि जो हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आते हैं, उनके साथ हम और अधिक विनम्रता से बात करके और जो वो मांगते हैं, उससे अधिक देते हैं। अमित शाह ने कहा कि इसी नीति के परिणामस्वरूप जो पुरानी समस्याएं मोदी सरकार को विरासत में मिली थी, उन्हें हम एक एक करके समाप्त करते जा रहे हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हम समझौतों की सभी शर्तों को अपने ही कार्यकाल में पूरा करते हैं और इन्हें पूरा करने का मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है।
समझौते की मुख्य विशेषताएं:
यह समझौता ज्ञापन असम की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता को प्रभावित किए बिना, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को और अधिक स्वायत्तता का हस्तांतरण, कार्बी लोगों की पहचान, भाषा, संस्कृति आदि की सुरक्षा और परिषद क्षेत्र में सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगा।
कार्बी सशस्त्र समूह हिंसा को त्यागने और देश के कानून द्वारा स्थापित शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सहमत हुए हैं। समझौते में सशस्त्र समूहों के कैडरों के पुनर्वास का भी प्रावधान है।
असम सरकार कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद क्षेत्र से बाहर रहने वाले कार्बी लोगों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक कार्बी कल्याण परिषद की स्थापना करेगी।
कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि को बढ़ाया जाएगा।
वर्तमान समझौते में कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को समग्र रूप से और अधिक विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां देने का प्रस्ताव है।
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