केन्द्रीय विद्युत एवं नवीन और तथा नवीकरणीय (एनआरई) मंत्री आर. के. सिंह ने राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के विद्युत/ऊर्जा विभागों के अपर मुख्य सचिवों और प्रधान सचिवों तथा विद्युत क्षेत्र सीपीएसयू के सीएमडी/एमडी के साथ समीक्षा, योजना निर्माण तथा निगरानी बैठक की अध्यक्षता की। विद्युत सचिव, एमएनआरई सचिव तथा दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में विद्युत राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर तथा एमएमआरई राज्य मंत्री भगवंत खुबा भी उपस्थित थे।
आर. के. सिंह ने अपने उद्घाटन संबोधन में रेखांकित किया कि वर्तमान सरकार ने विद्युत क्षेत्र को व्यापक रूप से आगे बढ़ाया है। देश विद्युत के मामले में अधिशेष हो गया है; हमने पूरे देश को एक ग्रिड से जोड़ दिया है और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाया है। इन कदमों ने ग्रामीण क्षेत्रों में 22 घंटे तथा शहरी क्षेत्रों में 23.5 घंटे विद्युत की उपलब्धता बढ़ा दी है। अगला कदम इसे किफायती मूल्य पर 24X7 घंटे की निर्बाधित विद्युत आपूर्ति तक ले जाना है।
उन्होंने कहा कि विद्युत की उपलब्धता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मूलभूत है और हमारा उद्देश्य इस देश के नागरिकों के लिए विश्वस्तरीय सेवाएं तथा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मंत्री ने क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की सुरक्षा के लिए और अधिक हरित ऊर्जा की दिशा में ऊर्जा रूपातंरण पर भी जोर दिया। विशेष रूप से किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी तथा सस्ती बिजली के रुप में पीएम कुसुम स्कीम के बहुगुणित लाभों पर भी जोर दिया गया। राज्य सरकारें सब्सिडी के कम बोझ के रूप में लाभ अर्जित करेंगी। स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन के रुप में पर्यावरण को भी इससे लाभ पहुचेगा। बैठक में कार्यान्वयन तथा सामने आने वाली समस्याओं की राज्यवार स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। पर्यावरण अनुकूल तरीके से पर्याप्त बिजली आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा पर बल दिया गया।
जेनको के बढ़ते बकाये के मामले पर भी विचार किया गया और सुझाव दिया गया कि समुचित मीटरिंग, बिलिंग तथा ऊर्जा लेखांकन के जरिए डिस्कॉम को तत्काल घाटे में कमी लाने से संबंधित कदम उठाए जाने चाहिए। संबंधित राज्य सरकारों द्वारा घोषित सब्सिडियों का समुचित लेखांकन तथा डिस्कॉम को भुगतान भी सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, इस पर जोर दिया गया कि उपभोक्ताओं को 24X7 निर्बाधित बिजली आपूर्ति कराने के लिए, प्रचालनगत रूप से प्रभावी तथा वित्तीय रूप से व्यवहार्य बिजली वितरण क्षेत्र आवश्यक है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार ने हाल ही में 3.0 लाख करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र स्कीम लॉन्च की है। इस स्कीम का उद्देश्य एटीएंडसी नुक्सान को कम करके 12-15 प्रतिशत पर लाना तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 तक अखिल भारतीय स्तर पर एसीएस-एआरआर अंतराल को खत्म करना है। बैठक में विभिन्न राज्यों की योजनाओं के निर्माण की समीक्षा की गई। स्कीम दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य योजनाओं तथा डीपीआर की तैयारी में सभी राज्य तथा डिस्कॉम अच्छी प्रगति कर रहे हैं।
विद्युत राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने सौभाग्य स्कीम, डीडीयूजीजेवाई के तहत 100 प्रतिशत विद्युतीकरण अर्जित करने में राज्य सरकारों के प्रयासों तथा सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिजली ही विकास की कुंजी है। पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र स्कीम की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि बिजली मूल्य श्रृंखला में उपभोक्ताओं के लिए डिस्कॉम नोडल प्वाइंट है और इसलिए उनका प्रदर्शन ही मुख्य आधार है।
बैठक में यह दोहराया गया कि डिस्कॉम की उन्नत वित्तीय निर्वहनीयता न केवल कुल मिलाकर विद्युत क्षेत्र में निवेशों को आकर्षित करेगी बल्कि विद्युत की कम लागत और बेहतर उपभोक्ता सेवाओं के माध्यम से उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ पहुंचेगा।
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