केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री (एमओएस) मीनाक्षी लेखी ने आज दूतावासों के प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली में पुराना किला के ऐतिहासिक स्थल पर चल रहे उत्खनन कार्य का निरीक्षण करने के लिए दौरा किया। इंद्रप्रस्थ के प्राचीन शहर के रूप में पहचाने जाने वाला यह स्थल कई दशकों से पुरातात्विक रुचि का विषय रहा है। उत्खनन से महत्वपूर्ण निष्कर्षों का पता चला है, जिससे दिल्ली के 2500 वर्षों से अधिक के निरंतर इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के भव्य उत्सव के अवसर के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने आने वाले प्रतिनिधियों को पुराना किला में सूक्ष्म उत्खनन के माध्यम से प्राप्त की गई मनोरम खोजों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया।
भारत में सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में से एक के रूप में, पुराना किला महान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है और इसकी खुदाई इसके रहस्यों को उजागर करने का एक निरंतर प्रयास रहा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के निदेशक, और पुराना किला में चल रहे उत्खनन की देखरेख करने वाले मुख्य उत्खननकर्ता डॉ. वसंत कुमार स्वर्णकार ने प्रतिनिधियों की एक विशिष्ट सभा के साथ-साथ इसकी दीवारों के भीतर समृद्ध विरासत और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उल्लेखनीय निष्कर्षों को संस्कृति राज्य मंत्री महोदया के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने प्राचीन कलाकृतियों, संरचनाओं और वास्तु चमत्कारों को उजागर करने की जटिल प्रक्रिया का विवरण देते हुए चल रहे शोध में मूल्यवान जानकारी साझा की।
इस प्रस्तुति ने संस्कृति राज्य मंत्री महोदया और प्रतिनिधियों को प्राचीन सभ्यताओं की मनोरम दुनिया में खुद को डुबोने और पुराना किला की परतों के भीतर संरक्षित मानव इतिहास के ठोस प्रमाणों को देखने में सक्षम बनाया।
माननीय संस्कृति राज्य मंत्री महोदया ने नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने की आवश्यकता पर बल देते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से उत्खनन से पहले लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (एलआईडीएआर) सर्वेक्षण करने का आग्रह किया।
संस्कृति राज्य मंत्री महोदया के साथ प्रतिनिधियों के अलावा संस्कृति मंत्रालय में सचिव गोविंद मोहन, संयुक्त सचिव संजुक्ता मुद्गल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक के.के. बसा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उत्तरी क्षेत्र के निदेशक, एसएडी दिल्ली सर्कल के साथ संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) एएसआई के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
जनवरी 2023 में शुरू की गई खुदाई का उद्देश्य स्थल के बारे में पूरा कालक्रम स्थापित करना है। वर्तमान में, शुरुआती कुषाण काल की संरचनाएं उजागर हुई हैं, जिनकी गहराई 5.50 मीटर तक पहुंच गई है। इस खुदाई से प्राचीन शहर इंद्रप्रस्थ के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना है।
उत्खनन से कलाकृतियों का उल्लेखनीय संग्रह प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय निष्कर्षों में वैकुंठ विष्णु की एक पत्थर की छवि, गज लक्ष्मी की एक टेराकोटा पट्टिका, गणेश की एक पत्थर की छवि, मुहरें और मुद्रण, सिक्के, मनुष्यों और जानवरों की टेराकोटा मूर्तियां, विभिन्न पत्थरों के मोती, टी.सी. और हड्डी की सुई शामिल हैं। इन कलाकृतियों, मिट्टी के बर्तनों और अन्य पुरावशेषों के साथ, स्थल पर प्राचीन सभ्यता और व्यापार गतिविधियों में मूल्यवान जानकारी प्रदान करते हैं।
उत्खनन से 2500 वर्षों तक फैले मानव आवास और गतिविधियों के निरंतर अस्तित्व का पता चला है, जो पुराना किला के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है। एक छोटे से उत्खनित क्षेत्र से 136 से अधिक सिक्के और 35 मुहरें और मुद्रण मिली हैं, जो व्यापार गतिविधियों के केंद्र के रूप में स्थल की महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत देती हैं।
इसके अलावा, पुराना किला में खुदाई के अवशेष जी-20 शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधियों के लिए आकर्षण के बिंदु के रूप में काम करेंगे, जिसमें जी-20 देशों के प्रमुख शामिल होंगे। जी-20 शिखर सम्मेलन सितंबर 2023 में दिल्ली में आयोजित होने वाला है।
पुराना किला भारत की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक विविधता के लिए एक प्रपत्र के रूप में खड़ा है, और जारी उत्खनन कार्य क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व के बारे में हमारी समझ को और गहरा करने का भरोसा प्रदान करता है। ओपन एयर साइट म्यूज़ियम की स्थापना के साथ-साथ सुरक्षा और संरक्षण के प्रयास यह सुनिश्चित करेंगे कि इस ऐतिहासिक खजाने को वर्तमान और भावी पीढ़ियों द्वारा सराहा जा सके।
पुराना किला अतीत में कई खुदाई का साक्षी रहा है। विशेष रूप से, पद्म श्री प्रो.बी.बी.लाल ने वर्ष 1955 और वर्ष 1969 से 1973 के बीच में खुदाई की, इसके बाद वर्ष 2013-14 और वर्ष 2017-18 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के डॉ. वसंत कुमार स्वर्णकार के नेतृत्व में खुदाई की। इन प्रयासों ने नौ सांस्कृतिक स्तरों को प्रकट किया है, जो पूर्व-मौर्य, मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त, उत्तर-गुप्त, राजपूत, सल्तनत और मुगल सहित विभिन्न ऐतिहासिक काल का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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