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केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने त्रिपुरा में रोजगार और ‘रोजगार लायक क्षमता’ बढ़ाने के उद्देश्य से ‘हार्टलैंड त्रिपुरा’ परियोजना का उद्घाटन किया

त्रिपुरा के युवाओं की रोजगार लायक क्षमता और कौशल बढ़ाने के लिए डेलॉइट इंडिया और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी), अगरतला के साथ साझेदारी में आज ‘हार्टलैंड त्रिपुरा’ नामक एक परियोजना शुरू की गई। केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने अगरतला में अगरतला में संबंधित समारोह का उद्घाटन किया, जहां डेलॉइट इंडिया और एनआईईएलआईटी -अगरतला ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

यह परियोजना इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग दोनों ही क्षेत्रों में स्नातक-पूर्व (अंडर ग्रेजुएट) छात्रों के लिए करियर और व्यक्तिगत विकास के नए अवसर उपलब्‍ध कराएगी। इसके लिए भारत सरकार और त्रिपुरा की राज्य सरकार की ओर से आवश्‍यक सहायता मुहैया कराई जाएगी।

‘हार्टलैंड त्रिपुरा’ परियोजना के तहत इस राज्य के लिए एनआईईएलआईटी -अगरतला के माध्यम से कौशल विकास प्रमाणन पाठ्यक्रमों का एक विशिष्ट सेट उपलब्‍ध कराया जाएगा। इसके अलावा, यह परियोजना चयनित प्रोफेशनलों को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेगी जिससे अंततः प्रमाणन और इंटर्नशिप संबंधी आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लेने पर आशाजनक रोजगार संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। इस परियोजना के पायलट चरण में लगभग 350 स्नातकों को प्रशिक्षण और रोजगार अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है, जो निर्धारित आकलन मानदंडों को पूरा कर लेने पर ही मिलेगा। इससे जनवरी 2024 तक 50 इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग छात्रों के लिए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है और मार्च से जून 2024 तक अधिकतम 300 इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग छात्रों के लिए रोजगार प्लेसमेंट तय है। .

“हार्टलैंड त्रिपुरा” के तहत पेश किए जाने वाले प्रमाणन पाठ्यक्रमों में साइबर सुरक्षा, आंतरिक ऑडिट एवं एनालिटिक्स जैसे नए युग के तकनीकी एवं व्यावसायिक विकास कौशल तथा व्यावसायिक संचार (बिजनेस कम्यूनिकेशन), प्रबंधकारी उपस्थिति (एग्जीक्यूटिव प्रेजेंस) एवं ग्रूमिंग से जुड़े व्यावहारिक कौशल को शामिल किया जाएगा।

यह पहल कॉलेजों में प्लेसमेंट सीजन की योजना बनाने और उसे कार्यान्वित करने में भी सहायता करेगी। इस परियोजना में शामिल किए गए कुछ शैक्षणिक संस्थान हैं- एनआईटी कॉलेज, त्रिपुरा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराजा बीर बिक्रम कॉलेज, अगरतला स्थित महिला कॉलेज और टीईसीई। डेलॉइट उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को तैयार करने हेतु एक उपयुक्त पाठ्यक्रम का निर्माण करेगा, एनसीवीईटी-आधारित प्रमाणीकरण को संचालित करेगा, अपने पेशेवरों के माध्यम से प्रशिक्षकों तक पहुंच प्रदान करेगा और प्लेसमेंट मेलों के आयोजन के लिए राज्य के कॉलेजों का मार्गदर्शन करेगा। इस परियोजना का उद्देश्य प्लेसमेंट के लिए लक्षित संगठनों की पहचान करना और त्रिपुरा के चुनिंदा कॉलेजों से नियुक्ति के लिए निजी कंपनियों के लिए एक एडवोकेसी नेटवर्क का निर्माण करना भी है।

मीडिया से बातचीत करते हुए, केन्द्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि डेलॉइट जैसी वैश्विक कंपनियां कौशल संबंधी वैसे कार्यक्रम बनाने में मदद कर रही हैं, जो त्रिपुरा के युवाओं को भविष्योन्मुखी और उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल हासिल करने में सक्षम बना रही हैं।

उन्होंने कहा, “2014 के बाद से, प्रधानमंत्री मोदी का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य कौशल के मुद्दे पर ध्यान देना रहा है। उस समय, श्रमशक्ति में शामिल 42 करोड़ लोगों में से, लगभग 31 करोड़ लोग अकुशल थे और उनके पास किसी औपचारिक शिक्षा या कौशल का अभाव था। भारत की आजादी के बाद से, हर चार में से तीन भारतीयों को बिना किसी औपचारिक शिक्षा या कौशल के काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वर्ष 2016 के बाद से, हमने इस परिवर्तन के एक चरण को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए, स्थिति को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू की। अब, कोविड के बाद के युग में, हमने कौशल का दूसरा चरण शुरू किया है, जिसे प्रधानमंत्री ने उद्योग के लिए तैयार और भविष्य के लिए तैयार कौशल के रूप में निरुपित किया है। इसमें उन कंपनियों के साथ निकटता से सहयोग करना शामिल है जो कुशल व्यक्तियों को काम पर रखेंगी। कौशल विकास कार्यक्रम उद्योग जगत के साथ साझेदारी में विकसित किए जा रहे हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने उद्घाटन सत्र के दौरान अपने संबोधन में कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित किये गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। मैं त्रिपुरा में युवाओं की क्षमताओं को उजागर करने के लिए सभी प्रयास करने, उनकी क्षमताओं पर विश्वास रखने और निवेश करने तथा सरकार के साथ साझेदारी करने के उद्देश्य से सहमत होने के लिए डेलॉइट को धन्यवाद देना चाहता हूं। भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र वर्तमान में तेजी से विकास पथ पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है और इसका कारण यह है कि अब मार्ग में संचालन जैसी अब कोई चुनौती शेष नहीं रह गई है। डेलॉइट, आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां कौशल विकास के इस चरण में सक्रिय रूप से शामिल हैं। एनआईईएलआईटी डिजिटल कौशल कार्यक्रमों के लिए इन कंपनियों के साथ साझेदारी करेंगी। उन्होंने कहा कि हम आने वाले सप्ताह में कृषि प्रसंस्करण और कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए भी योजनाएं लेकर आएंगे।

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