आज देश-विदेश में बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है। आज ही के दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और आज ही के दिन बुद्ध का परिनिर्वाण हुआ था। संयुक्त राष्ट्र, वर्ष 1999 से आज के दिन को संयुक्त राष्ट्र वैशाख दिवस के रूप में मनाता है। इस अवसर पर दिल्ली और देश के अन्य भागों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और हिमालयन बौद्ध संस्कृति संघ के साथ मिलकर आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में एक विशेष आयोजन किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की बधाई दी है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध करुणा की प्रतिमूर्ति थे और उन्होंने मानवजाति को संबोधि, सहिष्णुता और सदाचार का मार्ग दिखाया। राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान बुद्ध के संदेश हमें प्रेम, सत्य और अहिंसा की शिक्षा देते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा बुद्ध का जीवन आत्मनियंत्रण और अनुशासन के सर्वात्तम उदाहरण हैं।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुद्ध पूर्णिमा पर लोगों को बधाई दी है। उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध की शिक्षाओं के बारे में चिंतन करने का दिन है। भगवान बुद्ध ने मानवता को विचार और कर्म में श्रेष्ठता की ओर ले जाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि बुद्ध का अहिंसा, सहिष्णुता और शांति का संदेश सदियों से प्रतिध्वनित होता रहा है। भगवान बुद्ध की शिक्षाएं एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करती हैं, जो सहानुभूति और सद्भाव से ओतप्रोत है। जगदीप धनखड़ ने इस पावन अवसर पर भगवान बुद्ध के धम्म के सिद्धांतों के लिए स्वयं को समर्पित करने और सभी प्राणियों के प्रति दया-भाव अपनाने को कहा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुद्ध पूर्णिमा पर लोगों को बधाई दी है। ओम बिरला ने लोगों से सभी दिशाओं के लिए अहिंसा, दया और प्रेम के महात्मा बुद्ध के संदेश को याद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विश्व में अधिक शांति और सौहार्दपूर्ण जीवन के लिए इन सिद्धांतों के अनुसार जीना और कार्य करना चाहिए। ओम बिरला ने लोगों से राष्ट्र और मानवता के लिए स्वयं को समर्पित करने और महात्मा बुद्ध की शिक्षा को जीवन में अपनाने को प्रेरित किया है।
बिहार में बुद्ध पूर्णिमा धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। मुख्य आयोजन बोधगया के महाबोधि मंदिर में किया गया है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति की हुई। इस अवसर पर जापान, श्रीलंका और इंडोनेशिया सहित कई देशों से बौद्ध धर्मावलंबी बोधगया पहुंचे हैं। आज बोधगया में बोधवृक्ष के नीचे विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई।
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