सरकार ने इथेनॉल के लिए पांच अलग-अलग दरों की घोषणा की

सरकार ने इथेनॉल के लिए पांच अलग-अलग दरों की घोषणा की

इथेनॉल की आपूर्ति हेतु आगामी समर्पित इथेनॉल संयंत्रों के साथ दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए पहली पसंद की अभिव्यक्ति (ईओआई) को शानदार प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें 197 बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया है। यह ईओआई 27 अगस्त को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मार्गदर्शन में तेल विपणन कंपनियों की ओर से बीपीसीएल द्वारा प्रकाशित किया गया था, जो 17 सितंबर को खुली थी। वर्तमान में निविदाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है।

ईओआई को सफल बनाने के लिए सभी बोलीदाताओं को धन्यवाद देते हुए और उन्हें उनके उपक्रमों के लिए शुभकामनाएं देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा आवासन एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि यह ईओआई पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा उठाया गया एक सक्रिय कदम है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि तेल कंपनियां इथेनॉल की कमी वाले राज्यों में इथेनॉल उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के वास्ते परियोजना समर्थकों को प्रेरित करती हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य 20% और अधिक प्राप्त करने में राष्ट्र के लिए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है।

पिछले वर्ष 173 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद की गई थी और ईएसवाई – 2019-20 के दौरान 5% मिश्रण प्राप्त किया गया था। चालू वर्ष ईएसवाई – 2020-21 का लक्ष्य 325 करोड़ लीटर का है, जो सम्मिश्रण को 8.5% तक ले जाएगा। ईएसवाई – 2020-21 के दौरान वास्तविक खरीद अब तक 243 करोड़ लीटर रही है, जिससे 8.01% सम्मिश्रण हासिल हुआ है।

सरकार ने इथेनॉल उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले फीड स्टॉक के आधार पर इथेनॉल के लिए पांच अलग-अलग दरों की घोषणा की है। कच्चा माल और दरें इस प्रकार से हैं :

कच्चा माल
एक्स-मिल मूल्य प्रति लीटर

गन्ने का रस/चीनी/चीनी का शीरा
₹62.65

बी गुड़
₹57.61

सी गुड़
₹45.69

टूटा हुआ अनाज/मक्का
₹51.55

एफसीआई के साथ अतिरिक्त चावल
₹56.87

जीएसटी और परिवहन शुल्क का अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा, इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए दिए जा रहे अन्य प्रोत्साहन इस प्रकार से हैं: दीर्घकालिक प्रत्यक्षता/कुल खरीद आश्वासन; क्षमता वृद्धि के लिए ब्याज अनुदान योजना; इथेनॉल का अंतर लाभकारी मूल्य; ईओआई की शर्तों में छूट/बैंक गारंटी में कमी की शर्तें और आपूर्ति न होने पर जुर्माने का प्रावधान तथा राज्य की सीमा के भीतर खरीद प्राथमिकता देना।

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