संसद ने दिल्ली नगर-निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित कर दिया है। कल राज्य सभा ने विधेयक को मंजूरी प्रदान की, जिसे लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। विधेयक के बारे में विपक्ष द्वारा रखे गए संशोधन सदन ने नामंजूर कर दिए। विधेयक में दिल्ली निगर-निगम अधिनियम 1957 में फिर से संशोधन करने का प्रावधान है और मौजूदा तीन दिल्ली नगर-निगम को जोड कर एक दिल्ली नगर-निगम बनाने का प्रस्ताव है। इसमें पार्षदों की संख्या 272 से घटाकर अधिकतम 250 करने की भी व्यवस्था है।
विधेयक पर गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि विधेयक सभी संवैधानिक मानदंड का अनुपालन करते हुए लाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली संघराज्य क्षेत्र है, जहां अलग प्रावधान हैं और संसद को राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली के बारे में कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि नया विधेयक किसी भी तरह से दिल्ली के संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है।
अनुच्छेद 239एए के साथ, अनुच्छेद 239एए3बी के अनुसार संसद को दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र या उसके किसी भी बात के बारे में किसी भी विषय को कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 239एए3सी इसके तहत संसद को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधानसभा द्वारा बनाये गए किसी भी कानून को संशोधित करने का उसके स्वरूप को बदलने का या उसको निरस्त करने का भी अधिकार प्राप्त है। ये भूल जाते हैं कि दिल्ली राजधानी क्षेत्र पूर्ण राज्य नहीं इसका यूटी से भी अलग एक स्टेटस है और इसके लिए संविधान के अंदर अलग प्रोविजन है।
विधेयक पर बहस शुरू करते हुए कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने विधेयक का विरोध किया। उनका कहना था कि यह विधेयक संवैधानिक रूप से संदिग्ध और कानूनी रूप से अक्षम्य है।
विधेयक के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी के सुधांशु त्रिवेद्वी ने कहा कि यह विधेयक संवैधानिक मानदंड के अनुरूप है और कानूनी दृष्टि से उपयुक्त है।