विदेश मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा है कि राजनयिक प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। कल रात न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें अधिवेशन में उन्होंने कहा कि विश्व जगत को शांति, प्रगति और खुशहाली के मार्ग पर लौटने के प्रयास करने होंगे।
डॉ. जयशंकर ने यूक्रेन के मुद्दे पर भारत का यह नजरिया दोहराया कि वह इस समस्या के शांतिपूर्ण और राजनयिक समाधान के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में कहा था कि भारत इस संघर्ष को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के शीघ्र समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र के दायरे में और बाहर से भी सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
विदेश मंत्री ने कहा है कि भारत सीमापार से आतंकवाद के खिलाफ कडी कार्रवाई की नीति पर अडिग है। उन्होंने कहा कि भारत, दशकों से सीमापार से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता। डॉ० जयशंकर ने कहा कि जिन देशों ने संयुक्तराष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों का बचाव किया है, उन्होंने न तो अपने हितों की रक्षा की है और न ही अपनी प्रतिष्ठा की चिंता की है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रगति-पथ पर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले 25 वर्ष में भारत को विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है।
विदेश मंत्री ने पिछले 75 वर्ष में भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि उपनिवेशवाद ने भारत को एक निर्धन देश बना दिया था लेकिन आज यह विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
डॉ. जयशंकर ने भारत की कोविड वैक्सीन पहल की भी चर्चा की, जिसके तहत एक सौ से अधिक देशों की मदद की गई। उन्होंने कहा कि भारत अपने विकास लक्ष्यों को पूरा करने के साथ-साथ समग्र एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमरीकी देशों के साथ भी साझेदारी की पेशकश कर रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन की रोकथाम में समान भागीदारी के लिए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, एक सूर्य-एक विश्व-एक ग्रिड और आपदा समायोजी बुनियादी ढांचा पहल के तहत अन्य साझेदारों के साथ प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि और पेरिस समझौते के तहत जलवायु परिवर्तन पर अंकुश के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत, संयुक्त राष्ट्र और इसके घोषणा पत्र के प्रति संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए भारत संयुक्त राष्ट्र के मिलकर काम करना जारी रखेगा।