बिहार सरकार ने जाति आधारित सर्वेक्षण पर अंतरिम रोक लगाने के पटना उच्च न्यायालय के फैसले के विरूद्ध आज उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। इससे पहले, इस महीने की आठ तारीख को मुकदमे की जल्द सुनवाई के संबंध में किए गए एक आवेदन को भी पटना उच्च न्यायालय ने नामंजूर कर दिया था, इसीलिए राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की।
मुख्य न्यायाधीश के० विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ अपने पहले के निर्णय पर अडिग रही कि वह मामले की सुनवाई इस वर्ष तीन जुलाई को ही करेगी। चार मई को उच्च न्यायालय ने जाति आधारित सर्वेक्षण पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया था। न्यायालय का कहना था कि सर्वेक्षण की आड में यह गणना कराई जा रही है। उच्च न्यायालय ने कहा कि गणना कराने का अधिकार संसद के पास है।