प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि व्यापार और जीवन की सुगमता की तरह ही न्याय की सुगमता भी बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित पहले अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सम्मेलन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण त्वरित न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि न्याय प्रदान करने के साथ-साथ किसी समाज के लिए न्यायिक प्रणाली तक पहुंच होना भी महत्वपूर्ण है, इसके लिए न्यायिक बुनियादी ढांचा अहम भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में देश की न्यायिक प्रणाली की अवसंरचना को मजबूत करने के लिए तेजी से काम किया गया।
सूचना प्रौद्योगिकी और फिनटेक क्षेत्र में भारत के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी की ताकत को दर्शाने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ई-कोर्ट मिशन के तहत देश में वर्चुअल कोर्ट शुरू किए जा रहे हैं। यातायात उल्लंघन जैसे अपराधों के लिए अदालतों ने चौबीसों घंटे काम करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में वर्चुअल माध्यम से एक करोड़ से ज्यादा मुकदमों की सुनवाई हो चुकी है।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि अमृतकाल हमारे दायित्वों को निभाने का समय है। उन्होंने कहा कि हमें उन क्षेत्रों में काम करना है जो अब तक उपेक्षित रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर विचाराधीन कैदियों के संवेदनशील मुद्दे का जिक्र किया और कहा कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण कैदियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभा सकता है।
प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि जिला स्तर पर न्यायपालिका को मजबूत करना समय की मांग है, क्योंकि यही देश में विधिक सहायता आंदोलन की प्रेरक शक्ति है। उन्होंने तेजी से न्याय दिलाने के लिए आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी की आवश्यकता पर बल दिया। न्यायमूर्ति रमना ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण सभी हितधारकों के साथ सहयोग कर रहा है ताकि विचाराधीन मुकदमों में राहत मिल सके।
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस महीने की 16 तारीख से ‘विचाराधीन कैदी रिहाई समीक्षा समिति @ 75’ अभियान शुरू किया है ताकि उन कैदियों की पहचान की जा सके जिनकी रिहाई के लिए समीक्षा समिति सिफारिश कर सके। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए समीक्षा समिति की हर सप्ताह बैठक होगी।
सम्मेलन में सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों में समानता लाने के लिए एकीकृत प्रक्रिया के सृजन पर विचार-विमर्श होगा।
देश में कुल 676 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हैं। जिला और सत्र न्यायाधीश प्राधिकरण का अध्यक्ष होता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण कई विधिक सहायता और जागरूकता कार्यक्रम लागू करता है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, लोक अदालत का आयोजन करके अदालतों का भार कम करते है।