नागरिकता संशोधन अधिनियम से देश में मुस्लिम आबादी पर असर नहीं होना चाहिए: मोहन भागवत

नागरिकता संशोधन अधिनियम से देश में मुस्लिम आबादी पर असर नहीं होना चाहिए: मोहन भागवत

गुवाहाटी: राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम से देश में मुस्लिम आबादी पर असर नहीं होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि भारत अपने अल्‍पसंख्‍यक समुदाय की लम्‍बे समय से समुचित तरीके से देखभाल कर रहा है, लेकिन पाकिस्‍तान ऐसा करने में विफल रहा है। गुवाहाटी में मोहन भागवत ने असम के मुख्‍यमंत्री हेमंत बिस्‍व सरमा के साथ एन आर सी और सी ए ए पर बहस शीर्षक से पुस्‍तक का विमोचन किया। मोहन भागवत ने संविधान के अनुसार नागरिकों को अपने कर्तव्‍यों का निर्वहन करने पर बल दिया।

सीएए एनआरसी, सीएए किसी भारत के नागरिक के विरुद्ध बनाया हुआ कानून नहीं है। भारत के नागरिक मुसलमान को सीएए से कुछ नुकसान नहीं होगी। ये किसी के खिलाफ नहीं है। परंतु बात जब जाती है क्‍योंकि जाना ही है उसको, सरकार कहेगी ये सब नहीं तो ये पॉलिटिकल डोमिन में जाएगा और भय जैसी पॉलिटिक्‍स की स्थिति उसमें इसका केवल पॉलिटिकल माइलेज के हिसाब से विचार होगा अथवा उसी को हवा देने के लिए कुछ लोग सीधा इस नरेशन को कोम्‍युनल लाइंस में लाकर लोगों में डाल देंगे।

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया को भारत ने पांच हजार वर्ष पुरानी संस्‍कृति के माध्‍यम से धर्म निरपेक्षवाद सिखाया। आर एस एस प्रमुख ने कहा कि धर्म निरपेक्षता पर 2014 से बहस जारी है लेकिन देश का धर्मनिरपेक्षता का पुराना इतिहास रहा है।

अपने भक्ति में हम पक्‍के हैं, आपकी भक्ति में आप भी पक्‍के हैं। हमको कोई दिक्‍कत नहीं है। भाषा आपकी अलग-अलग है हमको कोई दिक्‍कत नहीं है। एक-दूसरे की भाषा का आदर सम्‍मान करके हम रहेंगे। एक-दूसरे की भाषाओं की सुरक्षा की भी चिंता करें। सेक्‍युलरिज्‍म, सोशललिज्‍म, डेमोक्रेसी ये बातें दुनिया से हमको सीखनी नहीं है। यह हमारी परंपरा में हमारे खून में है और इसलिए सबसे अधिक प्रामाणिकता से उसको लागू करके उसको जीवंत रखा, हमारे देश ने रखा।

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