संसद ने आज संविधान – अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश दूसरा संशोधन विधेयक पारित कर दिया। राज्यसभा ने इसे आज मंजूरी दी जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी।
इस विधेयक के जरिये संविधान – अनुसूचित जाति आदेश, 1950 और संविधान -अनुसूचित जनजाति- उत्तर प्रदेश आदेश, 1967 में संशोधन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के चंदौली, कुशीनगर, संत कबीर नगर और संत रविदास नगर में गोंड समुदाय को अनुसूचित जाति की श्रेणी से बाहर रखने के उच्चतम न्यायालय के आदेश में संशोधन करना है और इन्हें इन जिलों में अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता देना है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस कानून के जरिए सरकार ने समुदाय विशेष की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कई उपाय किए हैं। इसके तहत अनुसूचित जनजाति के लिए बजट आवंटन 2013-14 में 24 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2021-2022 में 85 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया। उन्होंने कहा कि देश में अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा और आर्थिक विकास के लिए भी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसे 35 हजार गांवों में लागू किया गया है।