यूक्रेन के जपोरिजिया परमाणु संयंत्र पर कल फिर बमबारी हुई। परमाणु संयंत्र पर हमले के लिए यूक्रेन और रूस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। यूक्रेन की एनरगोटम एजेंसी ने कहा कि बिजलीघर के परिसर में बृहस्पतिवार को पांच बार गोलाबारी हुई। परिसर में जिस जगह रेडियोएक्टिव सामग्री रखी है, वहां भी हमला हुआ।
दूसरी तरफ रूस की तास समाचार एजेंसी ने रूस के अधिकारियों के हवाले से खबर दी है कि यूक्रेन ने संयंत्र पर दो बार गोलााबरी की जिससे कर्मचारियों की शिफ्ट बदलने की प्रक्रिया बाधित हुई।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कल इस स्थिति पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने दोनों पक्षों से परमाणु संयंत्र के निकट लड़ाई रोकने का आह्वान किया है। सुरक्षा परिषद की बैठक में अमरीका ने बिजलीघर के आसपास के क्षेत्रों को सैन्य रहित करने की तरफदारी की। अमरीका ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी – आई.ए.ई.ए. को घटनास्थल का निरीक्षण करने का आग्रह किया।
एंटोनियो गुतेरस ने एक बयान में कहा कि बिजलीघर परिसर को किसी भी सैन्य कार्रवाई के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इसे सैन्य मुक्त बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर तत्काल समझौते की आवश्यकता है।
जपोरिजिया परमाणु संयंत्र संघर्ष क्षेत्र में सीमा के निकट स्थित है। इस संयंत्र पर रूस की सेना का नियंत्रण है और यूक्रेन के कर्मचारी काम कर रहे हैं।
भारत ने यूक्रेन के जपोरिजिया परमाणु संयंत्र के पास हुई बमबारी पर चिंता जताई
भारत ने यूक्रेन में जपोरिजिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र में ईंधन भंडारण सुविधा के पास बमबारी पर चिंता व्यक्त की है। यूक्रेन में पिछले लगभग 6 महीने से चल रहे रूसी सैन्य अभियान के दौरान यह बमबारी हुई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रूचिरा कम्बोज ने कहा कि भारत दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करता है, ताकि परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा को कोई खतरा पैदा न हो। भारत का यह वक्तव्य यूक्रेन के इस आरोप के बाद आया है कि रूस ने कल फिर जपोरिजिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर बमबारी की। रूचिरा कम्बोज ने कहा कि भारत की ओर से यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों और सुविधाओं की सुरक्षा से संबंधित घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को बहुत महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि इनमें किसी भी दुर्घटना के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गम्भीर परिणाम हो सकते हैं।
