मुम्बई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम- एमएसआरटीसी के हड़ताली कर्मचारियों को 22 अप्रैल तक काम पर आने के निर्देश दिए और प्रशासन को उनके प्रति उदार रवैया रखने का आग्रह किया है। अनेकों कर्मचारियों के डयूटी पर पहले से ही आने के बाद न्यायालय ने बाकी कर्मचारियों को भी काम पर लौटने को कहा है क्योंकि सरकार राज्य सरकार के साथ एमएसआरटीसी के विलय को छोड़कर कर्मचारियों की लगभग सभी मांगों को स्वीकार कर चुकी है। राज्य सरकार ने कहा कि वह सभी कर्मचारियों को वापस लेने को तैयार है लेकिन उनके विरूद्ध मुकदमें वापस नहीं लिये जाएंगे। राज्य के परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा कि न्याय का अधिकार सभी को है लेकिन इसके लिए लोगों को बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल से न केवल राज्य परिवहन को हानि हुई है बल्कि कर्मचारी भी वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस राज्य परिवहन श्रमिक यूनीयन के महासचिव श्रीरंग बारणे ने कहा कि अभी स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और वे इस मामले पर आगे के स्पष्टीकरण मिलने के बाद अपने विचार देंगे।
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