प्रधानमत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कॉप-26 सम्‍मेलन में कहा- भारत एक मात्र प्रमुख अर्थव्‍यवस्‍था है, जिसने पेरिस समझौते का अनुपालन किया

प्रधानमत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कॉप-26 सम्‍मेलन में कहा- भारत एक मात्र प्रमुख अर्थव्‍यवस्‍था है, जिसने पेरिस समझौते का अनुपालन किया

भारत वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लेगा। वर्ष 2030 तक अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में से एक अरब टन की कमी की जायेगी। ब्रिटेन के ग्लास्गो में कॉप-26 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2030 तक गैर जीवाश्म ऊर्जा क्षमता पांच सौ गीगा वॉट कर देगा और अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा से करेगा।

पांच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं। पहला- भारत, 2030 तक अपनी नॉन फोरसिल एनर्जी कैपासिटी को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा। दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 परसेंट एनर्जी रिक्वायरमेंट रिन्‍यूएबल एनर्जी से पूरी करेगा। तीसरा- भारत अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक बिलियन टन की कमी करेगा। चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 परसेंट से भी कम करेगा। और पांचवा- वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा। ये पंचामृत, क्लाइमेट एक्शन में भारत का एक अभूतपूर्व योगदान होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व की कुल जनसंख्या का 17 प्रतिशत भारत में है और भारत का कार्बन उत्सर्जन केवल पांच प्रतिशत है। और मुझे खुशी है कि भारत जैसा विकासशील देश, जो करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में जुटा है, जो करोड़ों लोगों की ईज ऑफ लीविंग पर रात-दिन काम कर रहा है, आज विश्व की आबादी का 17 प्रतिशत होने के बावजूद, जिसकी इमिशन्स में रिस्‍पॉसिविलिटी सिर्फ 5 प्रतिशत रही है। उस भारत ने अपना कर्तव्य पूरा करके दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। आज पूरा विश्व मानता है कि भारत एकमात्र, बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसने पेरिस कमिटमेंट पर लेटर एंड स्पिरिट में डिलिवर किया है।

प्रधानमत्री मोदी ने कहा कि आज पूरा विश्व स्वीकार करता है कि केवल भारत ऐसी प्रमुख अर्थव्यवस्था है जिसने पेरिस जलवायु समझौते की मूल भावना का अनुपालन किया है। जलवायु वित्त की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने उन देशों पर दबाव बनाने की जरूरत बतायी, जो जलवायु वित्त की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित देशों को जितनी जल्दी संभव हो सके दस खरब डॉलर का जलवायु वित्त सुनिश्चित करना होगा। प्रधानमत्री मोदी ने विवेकपूर्ण उपभोग को समय की आवश्‍यकता बताया।

आज विश्‍व मान रहा है कि क्‍लाइमेंट चेंज में लाइफ स्‍टाइल की एक बडी भूमिका है। मैं आज आप के सामने वन वर्ल्‍ड मूवमेंट का प्रस्‍ताव रखता हूं। ये एक शब्‍द है लाइव एलआईएफई यानी लाइफ स्‍टाइल फोर एनवायरमेंट आज जरूरत है। हम सभी लोग एक साथ आकर कलेक्‍टयू पार्टि‍सिपेशन के साथ लाइफ स्‍टाइल फोर एनवायरमेंट यानी लाइफ को एक अभियान की तरह आगे बढायें। ये एनवायरमेंटल कौंशियस लाइफ स्‍टाइल का एक मास मूवमेंट बन सकता है। आज आवश्‍कता है माईंड लेस और ड्रिस्‍ट्रक्‍टिव कंजम्‍शन के बजाय माइंड फूल और डेलिब्रेट यूटिलाइजेशन की। यह मूवमेंट एक साथ मिलकर ऐसे लक्ष्‍य तय कर सकता है। जो ड्राईवर्स एरिया जैसे फिसिंग एग्रीकल्‍चर वेलनेस, पैकजिंग, हाऊसिंग हॉस्‍पपिटैलिटी टूरिज्‍म, क्‍लोदिंग, फैशन, वाटर मैनजमेंट और एनर्जी जैसे अनेक सेक्‍टर्स में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कॉप26 शिखर सम्मेलन से अलग ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से बातचीत की। दोनों नेताओं ने 2030 की जलवायु कार्य योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने व्यापार साझेदारी की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने ग्लास्गो में संवाददातों को बताया कि दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान, आतंकवाद से निपटने, हिंद- प्रशांत क्षेत्र, आपूर्ति श्रृंखला समायोजन और कोविड महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने सहित विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया।

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