केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- नागरिकता संशोधन अधिनियम किसी की भी नागरिकता नहीं छीनेगा

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दोहराया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम-सीएए नागरिकता का अधिकार देने का कानून है। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया है कि यह कानून किसी की भी नागरिकता नहीं छीनेगा। एक समाचार एजेंसी से साक्षात्‍कार में अमित शाह ने कहा कि सीएए अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाइ और पारसी शरणार्थियों को अधिकार और नागरिकता उपलब्‍ध कराएगा। उन्‍होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत उन सभी के समान अधिकार होंगे, क्‍योंकि अब वे भी भारत के नागरिक बन जाएंगे।

सीएए के कानून को भारतीय जनता पार्टी की सरकार लाई है, नरेन्‍द्र मोदी सरकार लाई है, इसको रिपील करना असंभव है। हम पूरे देश को जागरूक करेंगे और जहां तक असंवैधानिक होने का सवाल है तो वो ऑर्टिकल-14 का वायलेशन नहीं करती इसमें रीजनेबल क्‍लासिफिकेशन बहुत स्‍पष्‍ट है कि जिन लोगों पर भारत के पुराने हिस्‍सों में विभाजन के कारण देश से कटे हैं, अफगानिस्‍तान, पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश। जिन लोगों में धार्मिक प्रताडना होने के कारण जो भारत की शरण में आए हैं उसके लिए यह कानून है।

अमित शाह ने कहा कि उन्‍हें भारत के नागरिकों की तरह नागरिकता सूची में शामिल किया जाएगा और वे चुनाव लड सकेंगे तथा सांसद, विधायक, मुख्‍यमंत्री और मंत्री बन सकेंगे। गृह मंत्री ने स्‍पष्‍ट किया कि राष्‍ट्रीय नागरिकता रजिस्‍टर-एनआरसी का सीएए से कोई संबंध नहीं है।

अमित शाह ने कहा कि किसी के लिए भी दरवाजे बन्‍द नहीं हुए हैं और मुसलमानों को भी नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार है।

जिनके पास दस्‍तावेज नहीं है इसका रास्‍ता हम बाद में ढूंढेगे परन्‍तु जिनके पास दस्‍तावेज है वो एक रफ अंदाज से 85 प्रतिशत से ज्‍यादा है। सब लोग एप्‍लीकेशन करें मैं सबको अपील करता हूं ये एप्‍लीकेशन देश की सभी भाषाओं में है। आपकी भाषा में आप डाउनलोड कर सकते हों। आपके समय की अनुकूलता से भारत-सरकार आपको इंटरव्‍यू और डॉक्‍यूमेंट की ऑडिट के लिए बुलाएगी। ऑर्जिनल डॉक्‍यूमेंट लेकर आना पडेगा। पंद्रह अगस्‍त, 1947 से लेकर 31 दिसम्‍बर 2014 तक जो भी आए हैं वो और उनके बच्‍चों का भारत में स्‍वागत है।

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