केंद्रीय पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने पंचायतों के प्रतिनिधियों से यूएनडीपी द्वारा निर्धारित टिकाऊ विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पंचायतों को विकसित, शिक्षित और सशक्त बनाने का संकल्प लेने का आग्रह किया है। गिरिराज सिंह भूख की समस्या को खत्म करने के लिए ‘पंचायतों की भूमिका’ पर राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। वेबिनार का आयोजन पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आजादी का अमृत महोत्सवके उत्सव के कार्यक्रम के तहत किया गया था।
गिरिराज सिंह ने कहा कि पंचायतों को पहले भूख की चुनौतियों को स्वीकार करना होगा और उसके बाद ‘भूख को खत्म’ करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए फंड के आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पंचायतीराज मंत्रालय द्वारा तंत्र को और मजबूत करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। अब हमारा कर्तव्य है कि पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाये और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाये।”
गिरिराज सिंह ने स्वयं सहायता समूहों की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि पंचायतों को विभिन्न सरकारी योजनाओं को अमल में लाने के लिये महिलाओं को भागीदारी बढ़ानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं देश की आर्थिक ताकत बन रही हैं और पंचायतों की ताकत भी बन सकती हैं। गिरिराज सिंह ने ग्रामीण से शहरों की ओर माइग्रेशन को रोकने पर भी जोर दिया, इसके लिए उन्होंने पंचायतों से भारत सरकार के रुरल अर्बन मिशन का लाभउठाने की भी अपील की है।
इस मौके पर केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने कहा कि पंचायतें गांव का चेहरा बदल सकती हैं। उन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए युवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया। यह गरीबी उन्मूलन में काफी हद तक मदद करेगा। उन्होंने अन्य मंत्रालयों से अपनी विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वन के लिए पंचायतों के साथ सहयोग करने का भी आग्रह किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर जोर दिया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय के सचिव सुनील कुमार ने पंचायतों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनके क्षेत्र में कोई भूखा न सोए। उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना भी पंचायतों की जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली स्थानीय स्तर पर उचित तरीके से काम करे।
एक दिवसीय वेबिनार में, विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, विश्व खाद्य कार्यक्रम, यूएनडीपी के प्रतिनिधियों ने खाद्य उत्पादन की प्रचुरता और खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि उत्पादन, सार्वजनिक वितरण, खाद्य उत्पादन के दौरान नुकसान को न्यूनतम करना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों / विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। खाद्य उत्पादन और प्रसंस्करण हानि, पोषण सुरक्षा और 2030 तक भूख की समस्या को खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी तकनीकी समाधान का लाभ उठाना चाहिए।
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