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UAE के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार, विशेषकर भारत से UAE को निर्यात पर व्‍यापक प्रभाव डालता है ‘CEPA’

भारत-UAE व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के कार्यान्वयन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आज वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने इस उल्‍लेखनीय उपलब्धि पर भारत एवं यूएई के देशवासियों को बधाई दी और पिछले 11 महीनों में भारत एवं यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक विकास इंजन के रूप में सीईपीए की अहम भूमिका के बारे में चर्चा की। ‘सीईपीए’ सही मायनों में एक पूर्ण और व्‍यापक समझौता है जिस पर 18 फरवरी 2022 को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के महामहिम राष्ट्रपति एवं अबू धाबी के शासक महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। सीईपीए 01 मई 2022 से प्रभावी हुआ था।

वाणिज्य सचिव ने कहा कि दोनों ही पक्ष दोनों देशों के बीच ‘कारोबार करने में सुगमता’ और ज्‍यादा बढ़ाने के लिए निरंतर आपस में मिलकर काम कर रहे हैं। उद्योग जगत के विभिन्‍न प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने के लिए सीईपीए का लाभ उठाने के अपने अनुभवों के बारे में बताया।

पिछले एक वर्ष के दौरान ‘सीईपीए’ ने यूएई के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार और विशेषकर भारत से यूएई को निर्यात (तेल और गैर-तेल) पर व्‍यापक प्रभाव डाला है। भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान ऐतिहासिक ऊंचाई को छू गया है। द्विपक्षीय व्यापार 72.9 अरब अमेरिकी डॉलर (अप्रैल 21-मार्च 2022) से बढ़कर 84.5 अरब अमेरिकी डॉलर (अप्रैल 22-मार्च 2023) हो गया है, जो कि सालाना आधार पर 16% की दमदार वृद्धि दर्शाता है। ‘सीईपीए’ के कार्यान्वयन की अवधि (मई 22 से मार्च 23 तक) के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 67.5 अरब अमेरिकी डॉलर (मई 21-मार्च 2022) से बढ़कर 76.9 अरब अमेरिकी डॉलर (मई 22-मार्च 2023) हो गया जो कि सालाना आधार पर 14% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

भारत से संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात भी बढ़कर कई वर्षों के उच्चतम स्तर को छू गया है। अप्रैल-मार्च की अवधि के दौरान भारत से संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात 28 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 31.3 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जो कि लगभग 3.3 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि; या प्रतिशत के संदर्भ में 11.8% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि के दौरान भारत के वैश्विक निर्यात में 5.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि संयुक्त अरब अमीरात को छोड़ भारत का वैश्विक निर्यात 4.8% की दर से बढ़ा।

सीईपीए के कार्यान्वयन की अवधि (मई 22 – मार्च 23) के दौरान भारत से संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात 26.2 अरब (मई 21 – मार्च 22) से बढ़कर 28.5 अरब डॉलर (मई 22 – मार्च 23) हो गया जो कि 8.5% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि के दौरान संयुक्त अरब अमीरात को छोड़ भारत का वैश्विक निर्यात 3.1% की दर से बढ़ा। अप्रैल 22 से मार्च 23 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात से भारत में आयात बढ़कर 53.2 अरब अमेरिकी डॉलर (18.8% की वार्षिक वृद्धि) हो गया। इसी अवधि के दौरान गैर-तेल आयात में 4.1% की वृद्धि दर्ज की गई।

सीईपीए की बदौलत व्‍यापक निर्यात वृद्धि दर्ज करने वाले श्रम-गहन क्षेत्रों सहित कुछ प्रमुख क्षेत्रों में ये शामिल हैं: खनिज ईंधन; विद्युत मशीनरी (विशेषकर टेलीफोन उपकरण); रत्न और आभूषण; ऑटोमोबाइल (परिवहन वाहन खंड); आवश्यक तेल/इत्र/प्रसाधन सामग्री (सौंदर्य/त्वचा देखभाल उत्पाद); अन्य मशीनरी; अनाज (चावल); कॉफी/चाय/मसाले; अन्य कृषि उत्पाद; और रासायनिक उत्पाद।

‘भारत-यूएई सीईपीए’ का उपयोग महीने-दर-महीने निरंतर बढ़ रहा है। सीईपीए के तहत जारी किए गए मूल देश के अधिमान्य प्रमाण पत्रों (सीओओ) की संख्या मई 2022 के 415 से बढ़कर मार्च 2023 में 8440 के उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गई। 11 माह (मई 22- मार्च 23) की अवधि के दौरान सीईपीए के तहत 54,000 से भी अधिक सीओओ जारी किए गए।

भारत-यूएई सीईपीए के तहत वस्‍तुओं के क्षेत्र में यूएई ने भारत से 99% आयात से वास्‍ता रखने वाली अपनी 97.4% टैरिफ लाइनों पर देय शुल्क को समाप्त कर दिया। भारत ने मूल्य के संदर्भ में भारत के 90% निर्यात से वास्‍ता रखने वाली अपनी 80% से अधिक टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क समापन हासिल कर लिया है। इनमें से अधिकतर टैरिफ लाइनें श्रम प्रधान उद्योगों/क्षेत्रों जैसे कि तिलहन और तेल, पेय पदार्थ, कपास, मछली और मछली उत्पाद, वस्‍त्र, कपड़े, रत्न और आभूषण, चमड़ा, जूते, फार्मास्यूटिकल्स और कई इंजीनियरिंग उत्पादों से संबंधित हैं।

सेवा क्षेत्र में सभी क्षेत्रों और आपूर्ति के तरीकों में व्यापक और मजबूत प्रतिबद्धताएं व्‍यक्‍त की गई हैं। 160 सेवा उप-क्षेत्रों में से भारत ने संयुक्त अरब अमीरात को 100 उप-क्षेत्रों की पेशकश की है और संयुक्त अरब अमीरात ने भारत को 111 उप-क्षेत्रों की पेशकश की है।

द्विपक्षीय व्यापार, विशेष रूप से भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में व्‍यापक वृद्धि को देखते हुए सीईपीए का जीडीपी और रोजगार जैसे अन्य प्रमुख मैक्रोइकॉनॉमिक वैरिएबल पर संबंधित सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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