भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज ‘एकीकृत लाइसेंस (यूएल) के तहत डिजिटल कनेक्टिविटी अवसंरचना प्रदाता प्राधिकरण को लागू करने पर परामर्श पत्र जारी किया है।
राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (एनडीसीपी-2018) डिजिटल अवसंरचना पर अत्यधिक जोर देती है, जिसमें कहा गया है कि “डिजिटल अवसंरचना और सेवाएं देश के विकास और कल्याण के प्रमुख सक्षमकर्ताओं तथा महत्वपूर्ण निर्धारकों के रूप में तेजी से उभर रही हैं। एनडीसीपी-2018 भी अपने ‘प्रोपेल इंडिया’ मिशन को पूरा करने के लिए एक रणनीति के रूप में ‘’विभेदक लाइसेंसिंग के माध्यम से विभिन्न परतों (जैसे, अवसंरचना, नेटवर्क, सेवाओं और अनुप्रयोग परत) को खोलने में सक्षम बनाने” की भी परिकल्पना की गई है।
एक मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर (डीसीआई) उत्पादकता बढ़ाकर और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली सुविधाएं प्रदान करके आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। डीसीआई के विकास के संदर्भ में, विभिन्न देशों ने संसाधनों के बढ़ते उपयोग (स्पेक्ट्रम सहित), लागत में कमी, निवेश को आकर्षित करने और अवसंरचना/नेटवर्क परत और सेवा/अनुप्रयोग परतों को अलग करके सेवा वितरण खंड को मजबूत करने के लिए अपने दूरसंचार लाइसेंसिंग ढांचे को संयोजित किया है। ऐसे संरचना का लाभ यह है कि वे लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाते हैं और प्रौद्योगिकियों के संयोजन पर विचार करते हुए बाजार के विकास और समाज के सामाजिक आर्थिक कल्याण में सुधार के लिए अधिक अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
डीसीआई डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) और स्मार्ट शहरों के विकास के तहत विभिन्न सरकारी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण और अग्रणी भूमिका निभाती है। हाल ही में लॉन्च किया गया 5G भारत को एक ब्रॉडबैंड सुपरहाइवे में रूपांतरित कर देगा और देश की सामाजिक-आर्थिक संरचना में सुधार लाएगा। इस रोशनी में यह भी अनिवार्य है कि सक्रिय और निष्क्रिय अवसंरचना के निर्माण के लिए अनुकूल लाइसेंसिंग ढांचे के माध्यम से नई कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके परिणामस्वरूप आम साझा करने योग्य डीसीआई और नेटवर्क संसाधनों में वृद्धि, लागत में कमी, निवेश को आकर्षित करने, सेवा वितरण खंड को मजबूत करने और उद्योग 4.0, उद्यम खंड और विभिन्न अन्य उपयोग के मामलों के लिए 5जी सेवाओं के प्रसार में उत्प्रेरक भी साबित हो सकती है। .
हाल ही में, ट्राई को दूरसंचार विभाग के पत्र दिनांक 11.08.2022 के माध्यम से एक संदर्भ प्राप्त हुआ, जिसमें ‘टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर लाइसेंस (टीआईएल)’ लाइसेंस नाम से लाइसेंस की एक नई श्रेणी के निर्माण और ट्राई अधिनियम 1997 की धारा 11(1) (ए) के तहत ऐसे लाइसेंस के नियम और शर्तें, लागू लाइसेंस शुल्क आदि के बारे में अनुशंसाएं मांगी गई थीं।
‘एकीकृत लाइसेंस (यूएल) के तहत डिजिटल कनेक्टिविटी अवसंरचना प्रदाता प्राधिकरण लागू करने पर आधारित इस परामर्श पत्र (सीपी) का उद्देश्य एकीकृत लाइसेंस के तहत प्रस्तावित डीसीआईपी प्राधिकरण पर हितधारकों के विचार जानना है। परामर्श पत्र को टीआरएएल की वेबसाइट www.trai.gov.in पर रखा गया है। परामर्श पत्र पर हितधारकों से लिखित टिप्पणियां 09 मार्च, 2023 तक और प्रति-टिप्पणियां, यदि कोई हों, 23 मार्च, 2023 तक आमंत्रित की जाती हैं।
टिप्पणियां मुख्य रूप से jtadvbbpa-1@trai.gov.in को एक प्रति के साथ इलेक्ट्रॉनिक रूप में advbbpa@trai.gov.in पर भेजी जा सकती हैं। किसी भी स्पष्टीकरण/सूचना के लिए संजीव कुमार शर्मा, सलाहकार (ब्रॉडबैंड और नीति विश्लेषण), ट्राई से टेलीफोन नंबर +91-11-23236119 पर संपर्क किया जा सकता है।
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