हिंदू धर्म में सप्ताह के सभी वार अलग-अलग भगवान को समर्पित हैं। वहीं बुधवार भगवान गणेश जी को समर्पित है और इस दिन गणेश जी का पूजन करते हैं और कहा जाता हैं कि हर काम को शुरू करने से पहले इन्हीं का पूजन करते हैं ताकि काम बिना किसी विघ्न के संपन्न हो।ऐसे में अगर श्री गणेश संहिता की मानें तो मंगलमूर्ति गणेश सभी देवताओं में अपनी कुशाग्र बुद्धि व विवेक के कारण सबसे पहले पूजे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि धन संबंधित परेशानियां या अन्य कोई समस्या हो तो बुधवार के दिन भगवान श्रीगणेश जी का पूजन करने से हर समस्या दूर हो जाती है।
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अगर हर काम में सफलता पानी है तो बुधवार की रात को श्रीगणेश जी का विधिपूर्वक पूजन करने के बाद 12 नामों का जप 108 बार मोती या लाल चंदन की माला से करें।ऐसा करने से भगवान गणेश जी प्रसन्न हो जाएंगे और आपकी सभी समस्याओं को दूर कर देंगे। इसी के साथ नारद संहिता के अनुसार गणेश जी के इन 12 नामों का ध्यान करने से वे अपने भक्तों पर जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और आज हम आपको उन्हीं नामों को बता रहे हैं …
गणेशजी के 12 नाम- सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन। कहते हैं जो इन नामों का जाप करता है गणेश जी की कृपा से हर कामनाएं पूरी होने लगती है।
पूजन में समर्पित की जाने वाली सामग्रियों में सिंदूर बहुत ही शुभ माना गया है। विशेष तौर पर शिव परिवार या शिव के सभी अंश अवतारों पर सिंदूर चढ़ाने का बहुत ही महत्व है। इसके पीछे मान्यता यह है कि सिंदूर शिव के तेज से ही पैदा हुए पारे (धातु) से बना है। शिवजी के पुत्र भगवान श्री गणेश को सिंदूर चढ़ाना या सिंदूर से चोला चढ़ाने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। नित्ककर्म पूजा प्रकाश (पूजा पद्धिति पुस्तक) के अनुसार हर सप्ताह बुधवार को यहां दिए मंत्र के साथ श्री गणेश को सिंदूर अर्पित किया जा सकता है…
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्।।
गणेशजी की पूजन से घर-परिवार सहित सभी प्रकार की परेशानियां हो जाती हैं। गणेशजी को शमी के पत्ते भी मुख्य रूप से चढ़ाए जाते हैं। शमी पत्र भी दूर्वा की तरह ही गणेशजी को प्रिय है। शमी एक वृक्ष है। मान्यता है कि इस वृक्ष में शिवजी का वास माना जाता है। बुधवार को गणेशजी को शमी पत्र चढ़ाने पर बुद्धि को प्रखर होती है। क्लेशों का नाश होता है। मानसिक शांति मिलती है।
बुधवार को गणेशजी की पूजा में चावल, फूल, सिंदूर के साथ ही शमी पत्र भी चढ़ाएं। इस दौरान यहां दिए गए मंत्र का जप किया जा सकता है-
त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै।
शमी दलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक।।
दूसरा उपाय
बुधवार की सुबह स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर घर के मंदिर में या श्रीगणेश मंदिर में एक पान के पत्ते पर सिंदूर में घी मिलाकर या कुमकुम से रंगे चावल से स्वस्तिक बनाएं। इस पर गणपति स्वरूप कलावे यानी नाड़े में लिपटी सुपारी स्थापित करें। श्रीगणेश मूर्ति या स्वरूप की पूजा चावल, पुष्प, वस्त्र, रोली आदि पूजन सामग्री के साथ इस विशेष मंत्र के साथ दूर्वा समर्पित करें-
दूर्वा करान्सह रितान मृतन्मंगल प्रदान।
आनी तांस्तव पूजार्थ गृहाण परमेश्वर।।
संस्कृत या मंत्रों का ज्ञान न होने पर दूर्वा “ऊँ गं गणपतये नम:” या “श्री गणेशाय नम:” इस मंत्र के साथ भी चढ़ा सकते हैं। गणेशजी को मोदक का भोग लगाएं। अंत में घी के दीप जलाकर आरती करें। धार्मिक नजरिए से श्रीगणेश की विशेष दूर्वा मंत्र के साथ पूजा सभी संकट, बाधाओं को दूर कर अपार सुख और सफलता देने वाली मानी गई है।
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