तृष्णा ना जाये मन से, दोहा मथुरा वृन्दावन सघन, और यमुना के तीर, धन्य धन्य माटी सुघर, धन्य कालिंदी नीर।… Read More
बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दीना में आया।। बालक था रे जब आया करता, रोज खेल के जाया… Read More
जो मै ऐसा जानती, प्रीत करे दुख होय, नगर ढिंढोरा पीटती, प्रीत ना करिये कोई। एक बार तो राधा बनकर… Read More
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा, पितु मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा।। बंदी गृह… Read More
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