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“RISC-V (DIR-V) कार्यक्रम छात्रों, स्टार्टअप और उद्यमियों को अवसर प्रदान करेगा, जो भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्‍टम को और अधिक उत्प्रेरित करेगा”: राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने आज डिजिटल इंडिया आरआईएससी-वी (डीआईआर-वी) कार्यक्रम पर राष्ट्रव्यापी रोड शो को झंडी दिखाई। यह रोड शो 17-18 नवंबर 2023 को सी-डैक, आईईईई इंडिया काउंसिल और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आरआईएससी-वी डिजाइन क्षेत्र से जुड़े वैश्विक नेताओं की भागीदारी होगी।

2022 में मंत्री राजीव चंद्रशेखर द्वारा घोषित डिजिटल इंडिया आरआईएससी-वी (डीआईआर-वी) कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, (ए) आईआईटी मद्रास द्वारा 180 एनएम (एससीएल फाउंड्री) और 22 एनएम पर 32-बिट / 64-बिट शक्ति प्रोसेसर (इंटेल फाउंड्री) (बी) आईआईटी बॉम्बे द्वारा 180 एनएम पर 32-बिट एजेआईटी प्रोसेसर (एससीएल फाउंड्री) और (सी) सी-डैक द्वारा 130 एनएम पर 32-बिट वेगा प्रोसेसर (सिल्टेरा फाउंड्री) और 180 एनएम पर 64-बिट वेगा प्रोसेसर (एससीएल मोहाली) के लिए सफल टेपआउट किए गए।

सी-डैक ने अब वेगाप्रोसेसर चिप अर्थात एरिज माइक्रो, एरिज वी2, एरिज वी3, एरिज आईओटी और एरिज डॉट पर आधारित एरिज डेवलपमेंट बोर्ड की एक श्रृंखला सृजित की है। ये डेवलपमेंट किट पूरी तरह से स्वदेशी हैं और सीखने, एम्बेडेड सिस्टम डिज़ाइन और आईओटी अनुप्रयोगों के लिए लक्षित ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद हैं। आरआईएससी-वी आईएसए-कंप्‍लायंट वेगा प्रोसेसर पर निर्मित बोर्ड उपयोग में आसान हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से सुसज्जित हैं।

राजीव चंद्रशेखर के अनुसार, यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकियों को बनाने और अपनाने के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राजीव चन्द्रशेखर ने कहा, “हमारा मुख्य ध्यान डीआईआर-वी इको सिस्‍टम के विकास को सक्षम करना है, जिसका लक्ष्य भारत को चिप्स और सिस्टम के डीआईआर-वी परिवार के आसपास नवोन्‍मेषण करने में एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में उभरना है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकियों को सृजित करने और अपनाने के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्टार्ट-अप, छात्र और उद्यमी डीआईआर-वी-आधारित चिप्स और सिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो अंततः भारत को सेमीकंडक्टर राष्ट्र बनने में योगदान देंगे।

राजीव चन्द्रशेखर ने यह भी रेखांकित किया कि यह कार्यक्रम किस प्रकार सुनिश्चित करेगा कि डीआईआर वी-आधारित चिप्स और सिस्टम हमारे द्वारा दैनिक उपयोग किए जाने वाले विभिन्न डिजिटल उत्पादों में एकीकृत हों। उन्‍होंने कहा, “पिछले 50 वर्षों में, कंप्यूटर प्रोसेसर कई विचारों के साथ विकसित हुए हैं, अंततः एक मुख्य डिज़ाइन पर केंद्रित हुए हैं जिसे हर कोई अपना रहा है। अब, हमारा ध्यान डीआईआर-वी कार्यक्रम पर है, हम एक ऐसे भविष्य की कल्पना कर रहे हैं जहां डीआईआर वी-आधारित चिप्स और सिस्टम हमारे द्वारा दैनिक उपयोग किए जाने वाले विभिन्न डिजिटल उत्पादों में एकीकृत होंगे। भारत ने प्रमुख सरकारी परियोजनाओं में आरआईएससी-वी को भी अपनाया है, जिससे आरआईएससी-वी के आसपास स्टार्टअप अनुसंधान और नवोन्‍मेषण में वृद्धि देखी जा रही है। भारत आरआईएससी-वी आधारित डिज़ाइन पर काम करने वाले कई स्टार्टअप का आयोजन करता है, जो एमईआईटीवाई की भविष्य की डिज़ाइन पहल का भी हिस्सा हैं। उदाहरण के लिए, इनकोर सेमीकंडक्टर्स कॉन्फ़िगर करने योग्य आरआईएससी-वी प्रोसेसर कोर विकसित कर रही है, माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज त्रृटि-सहिष्णु सिस्टम पर काम कर रही है और मॉर्फिंग मशीन्‍स मल्टी-कोर रिकॉन्फ़िगर सिस्टम विकसित कर रही हैं।”

इस रोड शो का लक्ष्य 1500 प्रतिभागियों को डीआईआर-वी वेगा श्रृंखला के प्रोसेसर और उनके इकोसिस्‍टम में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करना है, जिसमें डेवलपमेंट बोर्ड, एसडीके और एप्लिकेशन डेवलपमेंट के उपयोग सहित सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं को शामिल किया गया है। प्रायोगिक सत्र एरिज डेवलपमेंट बोर्डों का उपयोग करके आयोजित किए जाएंगे, जो अरडुइनो-अनुरूप हैं। इसमें प्रमुख वैश्विक नेताओं के संबोधन भी शामिल होंगे, जिनमें एसआई फाइव के चीफ आर्किटेक्‍ट और यूसी बर्कले में प्रोफेसर प्रो. क्रस्टे असानोविक; आरआईएससी-वी इंटरनेशनल के सीईओ कैलिस्टा रेडमंड; वेंटाना माइक्रो सिस्टम्स के सीईओ बालाजी बक्था; आईआईटी मद्रास के निदेशक और डीआईआर-वी कार्यक्रम के चीफ आर्किटेक्‍ट प्रोफेसर कामकोटि सम्‍मलित हैं।

यह कार्यक्रम पूरे भारत में 15 शैक्षणिक संस्थानों जिनके नाम हैं – एलायंस यूनिवर्सिटी – बैंगलोर, अमृता यूनिवर्सिटी – बैंगलोर, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी – हैदराबाद, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी-पंजाब, कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी- केरल, गुरु तेग बहादुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी – दिल्ली, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान-मध्य प्रदेश, केआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस- गाजियाबाद, कोनेरू लक्ष्मैया यूनिवर्सिटी- आंध्र प्रदेश, मोदी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी- राजस्थान, नेताजी सुभाष इंजीनियरिंग कॉलेज – पश्चिम बंगाल, पीएसजी कॉलेज प्रौद्योगिकी विभाग- तमिलनाडु, ठाकुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी- महाराष्ट्र, वर्धमान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग – तेलंगाना और वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी)- तमिलनाडु, में एक साथ आयोजित किया जा रहा है।

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