बिजली मंत्रालय के तहत एक महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम तथा अग्रणी एनबीएफसी आरईसी लिमिटेड ने राजस्थान सरकार के साथ बिजली और गैर बिजली बुनियादी ढांचा सेक्टर की परियोजनाओं का वित्तपोषण करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, आरईसी लिमिटेड अगले छह वर्षों तक राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों, उपक्रमों, संस्थानों और योजनाओं को सालाना 20,000 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराएगी।
इस एमओयू से, राज्य के बुनियादी ढांचा सेक्टर बिजली परियोजनाओं, मेट्रो, सड़क एवं राजमार्ग, हवाई अड्डों,, आईटी बुनियादी ढांचा, तेल रिफाइनरी, इस्पात बुनियादी ढांचा, बंदरगाह एवं जलमार्ग, फाइबर ऑप्टिक्स, दूरसंचार, स्वास्थ्य क्षेत्र, पर्यटन बुनियादी ढांचा, कृषि एवं अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित परियोजनाओं में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है। यह गठबंधन बिजली और गैर बिजली बुनियादी ढांचा सेक्टर दोनों के विकास को सहायता प्रदान करने की आरईसी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है जिससे राज्य के अर्थिक विकास और समृद्धि को योगदान प्राप्त होगा। इस एमओयू पर आज, 10 मार्च 2024 को जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, राजस्थान की उप मुख्यमंत्री श्रीमती दिव्या कुमारी, राजस्थान सरकार के ऊर्जा राज्य मंत्री श्री हीरा लाल नागर, राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत, केंद्रीय कोयला सचिव श्री अमृत लाल मीणा, आरईसी के सीएमडी श्री विवेक कुमार देवांगन तथा एनटीपीसी, पावरग्रिड, एनएलसी इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों और कोल इंडिया के निदेशक की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
केंद्रीय बिजली एवं नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर के सिंह और केंद्रीय कोयला मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने इस कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेस के जरिये संबोधित किया तथा राजस्थान सरकार द्वारा शुरु की गई पहलों के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।
इस समझौते की चर्चा करते हुए आरईसी के सीएमडी श्री विवेक कुमार देवांगन ने कहा, ‘‘ हम राज्य भर में बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ाने के मिशन में राजस्थान सरकार के साथ सहयोग करने पर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इस साझेदारी के माध्यम से, हमारा लक्ष्य सतत विकास में सहायता करना और अन्य बुनियादी ढांचा सेक्टरों के विकास के साथ साथ क्षेत्र की उभरती ऊर्जा आवश्यकताओं पर ध्यान देना है। ‘‘
इस अवसर पर बिजली मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू) द्वारा राजस्थान सरकार के साथ 1.6 लाख करोड़ रुपए के समझौते हुए। इन समझौतों ने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को चिह्नित किया।
आरईसी विद्युत मंत्रालय के तहत एक ‘महारत्न’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है, और आरबीआई के साथ गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी), और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग कंपनी (आईएफसी) के रूप में पंजीकृत है। आरईसी पूरे बिजली – बुनियादी ढांचा क्षेत्र को वित्तपोषित करती है जिसमें उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज, पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं जैसी नई प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। हाल ही में, आरईसी ने गैर-विद्युत अवसंरचना क्षेत्र में भी विविधता ला दी है, जिसमें स्टील और रिफाइनरी जैसे अन्य क्षेत्र और सड़क और एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल, हवाई अड्डे, आईटी संचार, सामाजिक और वाणिज्यिक अवसंरचना ( शैक्षिक संस्थान, अस्पताल ), बंदरगाह और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल ( ई एंड एम ) कार्य शामिल हैं।
आरईसी लिमिटेड देश में बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए राज्य, केंद्र और निजी कंपनियों को विभिन्न परिपक्वता अवधि के ऋण प्रदान करती है। आरईसी लिमिटेड बिजली क्षेत्र के लिए सरकार की प्रमुख योजनाओं में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिका निभा रही है और प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य), दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई), राष्ट्रीय के लिए एक नोडल एजेंसी रही है। विद्युत निधि (एनईएफ) योजना जिसके परिणामस्वरूप देश में अंतिम-मील वितरण प्रणाली को मजबूत किया गया, 100% गाँव का विद्युतीकरण और घरेलू विद्युतीकरण हुआ। आरईसी को पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के लिए कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नोडल एजेंसी भी बनाया गया है। 31 दिसंबर, 2023 तक आरईसी की ऋण पुस्तिका 4.97 लाख करोड़ रुपये और नेट वर्थ 64,787 करोड़ रुपये है।
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