पीएम मोदी मन की बात संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को चालू करने में सफलता हासिल करने पर देश के परमाणु वैज्ञानिकों की सराहना की है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा यात्रा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से भारत का गौरव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह परमाणु सयंत्र पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बना है और ब्रीडर रिएक्टर बिजली उत्पादन के अलावा भविष्य के लिए नया ईंधन विकल्प भी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता अब 56 गीगावाट से अधिक हो गई है। पिछले वर्ष ही इसमें लगभग 6 गीगावाट की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भारत पवन ऊर्जा के क्षेत्र में चौथे स्थान पर है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित देश के कई राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। गुजरात के कच्छ, पाटन और बनासकांठा क्षेत्रों में बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के विकास के लिए सौर और पवन ऊर्जा आवश्यक हैं तथा युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिजली बचाने और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की ज़रूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा जनगणना अभियान विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभियान है और हर देशवासी को इसकी जानकारी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि जनगणना के लिए सभी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज की जा रही है। जनगणना प्रक्रिया को आसान बनाया गया है ताकि लोग अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकें। यह सुविधा जनगणना करने वाले कर्मचारियों के आने से 15 दिन पहले तक मिलेगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद मोबाइल या ई-मेल पर एक विशेष आईडी दी जाएगी जिसे दिखाकर जानकारी सत्यापित की जा सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिन राज्यों में स्व-जनगणना पूरी हो चुकी है, वहां जनगणना कर्मियों ने घरों की गणना शुरू कर दी है। अब तक लगभग एक करोड़ बीस लाख मकानों की सूची तैयार की जा चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनगणना प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आश्वस्त दिया कि नागरिकों की जानकारी गोपनीय रहेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष पहली मई को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और वैश्विक तनाव तथा संघर्ष को देखते हुए उनकी शिक्षाएं और अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण अमरीका के चिली में कोचीगुआज घाटी में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार करने वाले एक संगठन की चर्चा की। यह प्रयास लद्दाख के द्रुबपोन ओत्जर रिनपोचे के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। यह संगठन ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बौद्ध परंपरा प्रकृति से जुड़ना सिखाती है। उन्होंने कर्नाटक में सौ एकड़ में फैले कर्मा मठ का उदाहरण दिया जहां सात सौ से अधिक देशी वृक्षों का संरक्षण किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में प्रकृति संरक्षण की कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं। उन्होंने कच्छ के रण का जिक्र किया, जहां मानसून खत्म होते ही हर साल लाखों राजहंस आते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस दौरान पूरा इलाका गुलाबी हो जाता है, इसलिए इसे ‘फ्लेमिंगो सिटी’ कहा जाता है। उन्होंने बताया कि कच्छ के लोग इन्हें ‘लाखा जी की बाराती’ कहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र का भी जिक्र किया, जहां फसल कटाई के मौसम में हाथियों के झुंड गांवों के पास आ जाते हैं। इससे संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अब “गज मित्र” जैसे प्रयास शुरू हो गए हैं जिसके तहत ग्रामीण खुद हाथियों की निगरानी के लिए टीम बनाते हैं और समय रहते लोगों को सतर्क करते हैं। इससे संघर्ष कम हो रहा है और जनता का विश्वास बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण फिर से देखे जा रहे हैं। इनकी संख्या में काफी कमी आ गई थी, लेकिन निरंतर संरक्षण से यह संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि गोडावन पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की संख्या भी बढ़ने की संभावना है। यह पक्षी कभी देश के रेगिस्तानी क्षेत्रों की पहचान हुआ करता था, लेकिन कालांतर में यह पक्षी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया। इसके संरक्षण के लिए कई प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर में जिस बांस को कभी बोझ समझा जाता था, उसी से अब रोजगार, व्यापार और नवाचार को गति मिल रही है। ब्रिटिश कानून में बांस को वृक्ष का दर्जा दिया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत सख्त थे। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि बांस की ढुलाई बहुत कठिन थी, इसलिए लोग इसके कारोबार से दूर होने लगे थे। उन्होंने बताया कि एनडीए सरकार ने 2017 में कानून में बदलाव कर बांस को वृक्ष की श्रेणी से हटा दिया और आज पूर्वोत्तर में बांस क्षेत्र फल-फूल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा के गोमती जिले के बिजय सूत्रधार और दक्षिण त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती की चर्चा की जिन्होंने नए कानूनों को अपने लिए एक बड़ा अवसर समझा और आज वे पहले से कहीं बेहतर और अधिक बांस उत्पाद तैयार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि नागालैंड में दीमापुर और आसपास के क्षेत्रों में, कई स्व-सहायता समूह बांस से खाद्य उत्पाद तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खोरोलो क्रिएटिव क्राफ्ट्स की टीम बांस के फर्नीचर और हस्तशिल्प पर काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि मिजोरम के मामित जिले में बांस के टिशू कल्चर और पॉलीहाउस प्रबंधन पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि सिक्किम की राजधानी गंगटोक के पास लगस्तल बांस उद्यम टीम बांस से हस्तशिल्प, अगरबत्ती, फर्नीचर और आंतरिक सज्जा की वस्तुएं बनाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से पूर्वोत्तर से बांस के एक उत्पाद खरीदने की अपील की ताकि बांस उत्पाद के लिए कड़ी मेहनत करने वालों को प्रोत्साहन मिले।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीटिंग रिट्रीट गणतंत्र दिवस समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें विभिन्न बैंड विविध संगीत परंपराओं को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इस आयोजन में भारतीय संगीत का समावेश बढ़ा है, जिसे लोग पसंद कर रहे हैं। इस वर्ष के बीटिंग रिट्रीट समारोह में वायुसेना, थलसेना, नौसेना और सीएपीएफ बैंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। वायुसेना बैंड ने सिंदूर फॉर्मेशन और नौसेना बैंड ने मत्स्य यंत्र फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया था। थलसेना बैंड में वंदे मातरम के डेढ सौ वर्ष और क्रिकेट में भारत की सफलता को दर्शाया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीटिंग रिट्रीट की भव्यता सबका ध्यान आकर्षित करती है। उन्होंने जानकारी दी कि बीटिंग रिट्रीट का संगीत फिलहाल ओटीटी प्लेटफार्म वेव्स पर उपलब्ध है। उन्होंने इसे सुनने की अपील की ताकि वे सशस्त्र बलों और उनकी परंपराओं पर गर्व कर सकें।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के 20 करोड़ से अधिक दस्तावेज़ डिजिटाइज़ कर सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इनमें भोजपत्र पर लिखी सातवीं शताब्दी की गिलगित पांडुलिपियां और आठवीं शताब्दी का एक रोचक ग्रंथ श्रीभुवालय शामिल हैं। इन दस्तावेज़ में रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पत्र भी हैं, जिनसे उनके द्वारा 1857 में लिए गए कुछ निर्णयों का पता चलता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन, आज़ाद हिंद फौज और उनके भाषणों से संबंधित दस्तावेज़ भी हैं। पंडित मदन मोहन मालवीय से जुड़े दस्तावेज़ भी हैं। इनमें बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय – बीएचयू की स्थापना और हिंदी साहित्य सम्मेलन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है। संविधान सभा से संबंधित कई अनूठे दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इतिहास के इस अनूठे अनुभव के लिए अभिलेख हाइफन पटल डॉट इन पर जाने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने यूरोपीय गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में छठा स्थान प्राप्त करने वाली टीम की भी सराहना की। यह ओलंपियाड इस महीने के शुरु में फ्रांस के बोर्डो में आयोजित हुआ था जो विश्व की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक है। भारतीय टीम में मुंबई की श्रेया मुंद्रा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रीमोई बेरा शामिल थीं। श्रेया ने स्वर्ण, संजना ने रजत और शिवानी ने कांस्य जीतकर इतिहास रच दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र में एक महीने के गणित प्रशिक्षण शिविर में भाग लेते हैं। शिविर के अंत में, चयन परीक्षा ली जाती है। इस परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर भारतीय टीम का चयन किया जाता है। हर साल, देश भर से लगभग 6 लाख छात्र गणित ओलंपियाड में भाग लेते हैं।
प्रधानमंत्री ने गर्व व्यक्त किया कि ब्राजील में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पनीर प्रतियोगिता में दो भारतीय पनीर ब्रांडों को पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारत के डेयरी क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं और भारतीय पनीर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कलारी पनीर का उदाहरण दिया, जिसे “कश्मीर का मोज़ेरेला” कहा जाता है। गुर्जर-बकरवाल समुदाय पीढ़ियों से इसे बनाता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में लोकप्रिय “छुरपी” का भी जिक्र किया। उन्होंने “टोपली नु पनीर” के बारे में भी बताया, जिसे महाराष्ट्र और गुजरात में “सुरती पनीर” कहा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तकनीक के कारण पैकेजिंग में सुधार हो रहा है और भारतीय उत्पाद वैश्विक मानकों पर ख़रे उतर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 9 मई को ‘पोचीशे बोइशाख’ के अवसर पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि टैगोर बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न थे जिन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों को मूर्तरूप दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टैगोर ने ऐसे उद्योगों का समर्थन किया था जो स्थायी रोजगार दे सकें और जिनसे गांवों को लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि रवींद्र संगीत का प्रभाव आज भी दुनिया भर में है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मई का महीना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के स्मरण का अवसर भी होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उन सभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जिन्होंने देशभक्ति की अलख जगाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों को गर्मियों की छुट्टी का भरपूर आनंद लने और कुछ नया सीखने की सलाह दी। उन्होंने गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने का अनुरोध भी किया।
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