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आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) – वार्षिक रिपोर्ट जुलाई 2018 – जून 2019

अपेक्षाकृत अधिक नियमित समय अंतराल पर श्रम बल के आंकड़ों की उपलब्धता की अहमियत को ध्‍यान में रखते हुए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने अप्रैल 2017 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) का शुभारंभ किया। 

  1. पीएलएफएस के मुख्‍यत: दो उद्देश्य हैं:

वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्‍ल्‍यूएस) में केवल शहरी क्षेत्रों के लिए तीन माह के अल्‍पकालिक अंतराल पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (अर्थात श्रमिक-जनसंख्या अनुपात, श्रम बल भागीदारी दर, बेरोजगारी दर) का अनुमान लगाना।   

प्रति वर्ष ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में सामान्य स्थिति (पीएस + एसएस) और सीडब्‍ल्‍यूएस दोनों में रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों का अनुमान लगाना।

  1. प्रथम वार्षिक रिपोर्ट (जुलाई 2017-जून 2018) दरअसल मई 2019 में जारी की गई थी जिसमें ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों को कवर किया गया और जिसमें सामान्य स्थिति (पीएस + एसएस)  तथा वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्‍ल्‍यूएस) दोनों में रोजगार व बेरोजगारी के सभी महत्वपूर्ण मापदंडों के अनुमान दिए गए। यह दूसरी वार्षिक रिपोर्ट है जिसे एनएसओ द्वारा जुलाई 2018-जून 2019 के दौरान किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के आधार पर जारी किया जा रहा है।

बी.पीएलएफएस के तहत नमूने की संरचना

  1. नमूने (सैंपल) की संरचना ठीक वही है जो वर्ष 2017-18 के दौरान थी, अर्थात शहरी क्षेत्रों में एक रोटेशनल पैनल नमूना संरचना।  इस रोटेशनल पैनल स्‍कीम में शहरी क्षेत्रों के प्रत्‍येक चयनित परिवार के यहां चार बार आगमन होता है। प्रथम आगमन के तय कार्यक्रम के अनुसार इसकी शुरुआत की जाती है और बाद में पुनर्आगमन कार्यक्रम के अनुसार समय-समय पर तीन बार आगमन सुनिश्चित किया जाता है। शहरी क्षेत्र में प्रत्‍येक स्‍तर के भीतर एक पैनल के लिए नमूने दरअसल दो स्‍वतंत्र उप-नमूनों के रूप में लिए गए। रोटेशन योजना के तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रथम चरण वाली नमूना इकाइयों (एफएसयू)1 के 75 प्रतिशत का मिलान दो निरंतर आगमन के बीच अवश्‍य हो जाए। ग्रामीण नमूनों में कोई पुनर्आगमन नहीं हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए, एक स्‍तर/उप-स्‍तर के लिए नमूने बेतरतीब ढंग से दो स्वतंत्र उप-नमूनों के रूप में लिए गए। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए, सर्वेक्षण अवधि की प्रत्येक तिमाही में वार्षिक आवंटन के 25% एफएसयू को कवर किया गया। इन परिवर्तनों के मद्देनजर पीएलएफएस के अनुमान वर्ष 2011-12 और उससे पहले के वर्षों के रोजगार-बेरोजगारी सर्वेक्षण (ईयूएस) के निष्‍कर्षों के साथ तुलनीय नहीं हैं।

गांव और शहरी ब्लॉक सबसे छोटी क्षेत्र इकाइयां हैं जिन्‍हें क्रमशः ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्रथम-चरण वाली नमूना इकाइयों (एफएसयू) के रूप में रेखांकित किया गया है।

सी. नमूना लेने की विधि

  1. वार्षिक रिपोर्ट के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जुलाई 2018- जून 2019 के दौरान प्रथम दौरे या आगमन के लिए नमूने का आकार: जुलाई 2018- जून 2019 के दौरान अखिल भारतीय स्‍तर पर सर्वेक्षण के लिए आवंटित कुल 12800 एफएसयू (7024 गांव और 5776 शहरी फ्रेम सर्वे या यूएफएस ब्‍लॉक) में से कुल 12720 एफएसयू (6983 गांव और 5737 शहरी ब्‍लॉक) का सर्वेक्षण पीएलएफएस कार्यक्रम (कार्यक्रम 10.4) के प्रचार के लिए किया जा सका। सर्वेक्षण में शामिल परिवारों की संख्‍या 1,01,579 (ग्रामीण क्षेत्रों में 55,812 और शहरी क्षेत्रों में 45,767) थी। इसी तरह सर्वेक्षण में शामिल लोगों की संख्‍या 4,20,757 (ग्रामीण क्षेत्रों में 2,39,817 और शहरी क्षेत्रों में 1,80,940) थी।
  2. महत्‍वपूर्ण रोजगार एवं बेरोजगारी संकेतकों की अवधारणात्‍मक रूपरेखा : आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) में महत्‍वपूर्ण रोजगार एवं बेरोजगारी संकेतकों जैसे कि श्रम बल भागीदारी दरों (एलएफपीआर), कामगार-जनसंख्‍या अनुपात (डब्‍ल्‍यूपीआर), बेरोजगारी दर (यूआर), इत्‍यादि के अनुमान दिए जाते हैं। इन संकेतकों को नीचे परिभाषित किया गया है:

ए.  श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर): एलएफपीआर को कुल आबादी में श्रम बल के अंतर्गत आने वाले व्‍यक्तियों (अर्थात कहीं कार्यरत या काम की तलाश में या काम के लिए उपलब्‍ध) के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया जाता है।

बी. कामगारजनसंख्‍या अनुपात (डब्‍ल्‍यूपीआर):डब्‍ल्‍यूपीआर को कुल आबादी में रोजगार प्राप्‍त व्‍यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया जाता है।

सी. बेरोजगारी दर (यूआर) :इसे श्रम बल में शामिल कुल लोगों में बेरोजगार व्‍यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया जाता है।

डी. कार्यकलाप की स्थिति– सामान्‍य स्थिति :किसी भी व्‍यक्ति के कार्यकलाप की स्थिति का निर्धारण निर्दिष्‍ट संदर्भ अवधि के दौरान उस व्‍यक्ति द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर किया जाता है। जब सर्वेक्षण की तारीख से ठीक पहले के 365 दिनों की संदर्भ अवधि के आधार पर कार्यकलाप की स्थिति का निर्धारण किया जाता है तो इसे उस व्‍यक्ति के सामान्‍य कार्यकलाप की स्थिति के तौर पर जाना जाता है।

ई.  कार्यकलाप की स्थिति – वर्तमान साप्‍ताहिक स्थिति (सीडब्‍ल्‍यूएस) :जबसर्वेक्षण की तारीख से ठीक पहले के सात दिनों की संदर्भ अवधि के आधार पर कार्यकलाप की स्थिति का निर्धारण किया जाता है तो इसे उस व्‍यक्ति की वर्तमान साप्‍ताहिक स्थिति (सीडब्‍ल्‍यूएस) के रूप में जाना जाता है।

वर्ष 2018-19 के लिए पीएलएफएस के मुख्य निष्‍कर्ष अनुलग्‍नक वाले विवरण (स्‍टेटमेंट) में दिए गए हैं, जबकि पीएलएफएस की विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट, 2018-19 https://mospi.gov.in पर उपलब्ध है।

जून 2019 में समाप्त तिमाही के लिए पीएलएफएस पर रिपोर्ट को भी अब जारी किया गया है और यह https://mospi.gov.in पर उपलब्‍ध है।

पीएलएफएस , वार्षिक रिपोर्ट (2018- 2019) के मुख्‍य निष्‍कर्ष

विवरण 1: सभी उम्र के व्यक्तियों के लिए पीएलएफएस, 2018-19 और पीएलएफएस, 2017-18 के दौरान सामान्य स्थिति (पीएस+एसएस)* में एलएफपीआर, डब्‍ल्‍यूपीआर और यूआर (प्रतिशत में)

          अखिल भारतीय
 दरें ग्रामीण  शहरी  ग्रामीण + शहरी
           
  पुरुषमहिलाव्यक्तिपुरुषमहिलाव्यक्तिपुरुषमहिलाव्यक्ति
 (1)(2)(3)(4)(5)(6)(7)(8)(9)(10)
           

पीएलएफएस (2018-19)

 एलएफपीआर55.119.737.756.716.136.955.618.637.5
 डब्‍ल्‍यूपीआर52.119.035.852.714.534.152.317.635.3
 यूआर5.63.55.07.19.97.76.05.25.8
     पीएलएफएस (2017-18)    
 एलएफपीआर54.918.237.057.015.936.855.517.536.9
 डब्‍ल्‍यूपीआर51.717.535.053.014.233.952.116.534.7
  
 यूआर5.83.85.37.110.87.86.25.76.1
           

नोट: *(पीएस एसएस) = (प्रमुख कार्यकलाप की स्थितिसहायक आर्थिक कार्यकलाप की स्थिति)

प्रमुख कार्यकलाप की स्थिति– ऐसे कार्यकलाप की स्थिति जिस पर किसी व्‍यक्ति ने सर्वेक्षण की तिथि से ठीक पहले 365 दिनों के दौरान अपेक्षाकृत लंबा समय (अवधि संबंधी प्रमुख पैमाना) व्‍यतीत किया था, उसे उस व्‍यक्ति के सामान्‍य प्रमुख कार्यकलाप की स्थिति माना गया।

सहायक आर्थिक कार्यकलाप की स्थिति– ऐसे कार्यकलाप की स्थिति जिसमें किसी व्‍यक्ति ने अपने सामान्‍य प्रमुख कार्यकलाप के अलावा सर्वेक्षण की तिथि से ठीक पहले 365 दिनों की संदर्भ अवधि के दौरान 30 दिन या उससे अधिक समय तक कुछ आर्थिक गतिविधि की थी, उसे उस व्‍यक्ति के सहायक आर्थिक कार्यकलाप की स्थिति माना गया।

PIB

Khushi Bhargav

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