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प्रधानमंत्री के ब्लॉग का मूल पाठ लिंक्डइन पर

दृढ़ विश्वास और प्रोत्साहनों के जरिए सुधारों को लागू करवाना

कोविड-19 महामारी ने नीति-निर्माण के मामले में पूरी दुनिया की सरकारों के सामने बिल्‍कुल नई तरह की चुनौतियां पेश कर दी हैं। इस मामले में भारत कोई अपवाद नहीं है। निरंतरता सुनिश्चित करते हुए जन कल्याण के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अत्‍यंत अहम चुनौती साबित हो रहा है।

दुनिया भर में गहराए वित्तीय संकट के इस माहौल में, क्या आप जानते हैं कि भारत के राज्य वर्ष 2020-21 में काफी अधिक उधार लेने में सक्षम साबित हुए थे?  आपको यह जानकर शायद सुखद आश्चर्य होगा कि राज्य वर्ष 2020-21 में 1.06 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जुटाने में सफल रहे थे। संसाधनों की उपलब्धता में यह उल्लेखनीय वृद्धि ‘केंद्र-राज्य भागीदारी’ के विशिष्‍ट दृष्टिकोण से ही संभव हो पाई थी।

जब हमने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए अपनी ओर से आर्थिक उपाय किए, तो हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि हमारे समाधान ‘सभी के लिए एकसमान’मॉडल जैसे न रहें यानी ‘सभी के लिए एक जैसे’ही न हों। महाद्वीप के आकार वाले किसी संघीय देश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे नीतिगत उपायों को ढूंढना वास्तव में चुनौतीपूर्ण है जिनके जरिए राज्य सरकारों द्वारा सुधारों को लागू किए जाने को बढ़ावा दिया जा सके। लेकिन हमें अपनी संघीय राजनीति की मजबूती पर पूरा भरोसा था और हम ‘केंद्र-राज्य भागीदारी’की भावना से आगे बढ़े।

मई 2020 में, आत्मनिर्भर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में, भारत सरकार ने घोषणा की थी कि राज्य सरकारों को वर्ष 2020-21 के लिए बढ़ी हुई उधारी की अनुमति दी जाएगी। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के अतिरिक्त 2 प्रतिशत की अनुमति दी गई थी, जिसमें से 1 प्रतिशत के साथ कुछ आर्थिक सुधारों के कार्यान्वयन की शर्त रखी गई थी। भारतीय सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में सुधार के लिए इस तरह का प्रोत्साहन बहुत कम ही देखने को मिला है। यह एक ऐसा प्रोत्साहन था, जो राज्यों को अतिरिक्त धन प्राप्त करने के लिए प्रगतिशील नीतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता था। इस गतिविधि के परिणाम न केवल उत्साहजनक हैं, बल्कि इस धारणा के विपरीत भी हैं कि ठोस आर्थिक नीतियों के सीमित ग्राहक हैं।

चार सुधार जिनके साथ अतिरिक्त उधारी संबद्ध (हरेक में जीडीपी का 0.25 प्रतिशत) है, की दो विशेषताएं थीं। पहला, हर सुधार जनता के लिए जीवन सुगमता में सुधार और विशेष रूप से गरीबों, कमजोर और मध्यम वर्ग से संबंधित था। दूसरा, उनमें राजकोषीय स्थिरता को भी बढ़ावा दिया गया था।

‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ नीति के तहत पहले सुधार में राज्य सरकारों को सुनिश्चित करना था कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राज्य में सभी राशन कार्डों में परिवार के सभी सदस्यों की आधार संख्या भरी जानी थी और सभी उचित मूल्य दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल डिवाइस होनी थीं। इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रवासी कामगार देश में किसी भी स्थान से अपना राशन हासिल कर सकते हैं। नागरिकों को इन लाभों के अलावा, फर्जी कार्डों और डुप्लीकेट सदस्यों के हटने का वित्तीय फायदा होता है। 17 राज्यों ने इस सुधार को पूरा कर दिया है और उन्हें 37,600 करोड़ रुपये की धनराशि की अतिरिक्त उधारी दे दी गई है।

दूसरा सुधार, जिसका उद्देश्य कारोबारी सुगमता में सुधार था, के लिए राज्यों को सुनिश्चित करना था कि 7 अधिनियमों के तहत कारोबार से संबंधित लाइसेंसों का नवीनीकरण महज शुल्कों के भुगतान पर ऑटोमैटिक, ऑनलाइन और भेदभाव रहित हो। इसके अलावा अन्य 12 अधिनियमों के तहत उत्पीड़न और भ्रष्टाचार कम करने के लिए कंप्यूटर आधारित औचक निरीक्षण प्रणाली और निरीक्षण से पहले नोटिस की व्यवस्था को लागू करना था। इस सुधार (19 कानूनों को शामिल करते हुए) से विशेष रूप से सूक्ष्म और लघु उपक्रमों को सहायता मिली है, जो ‘इंस्पेक्टर राज’ के बोझ से सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करते हैं। इससे बेहतर निवेश परिदृश्य, ज्यादा निवेश और तेज विकास को भी प्रोत्साहन मिलता है। 20 राज्यों ने इस सुधार को पूरा कर लिया है और उन्होंने 39,521 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की अनुमति दे दी गई।

15वें वित्त आयोग और कई शिक्षाविदों ने सक्षम संपत्ति कराधान की अति महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर दिया है। तीसरे सुधार के लिए राज्यों को शहरी क्षेत्रों में स्टाम्प ड्यूटी गाइडलाइंस, लेन-देन के लिए मूल्य और वर्तमान लागत की अनुरूपता के साथ क्रमश: संपत्ति कर और पानी व सीवरेज चार्ज की न्यूनतम दरें अधिसूचित करने की आवश्यकता है। यह शहरी गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए सेवाओं की बेहतर गुणवत्ता, बेहतर बुनियादी ढांचे में सहायता को सक्षम बनाएगा और विकास को तेज करेगा। संपत्ति कर भी अपनी संभावनाओं में प्रगतिशील है और इससे शहरी क्षेत्र के गरीबों को सबसे अधिक लाभ होगा। इस सुधार से नगर निगम के कर्मचारियों को भी लाभ होता है, जो अक्सर वेतन के भुगतान में देरी का सामना करते हैं। इन सुधारों को 11 राज्यों ने पूरा कर लिया और उन्हें 15,957 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज की अनुमति दे दी गई।

चौथा सुधार किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली आपूर्ति के बदले में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की शुरुआत थी। वर्ष के अंत तक एक जिले में प्रायोगिक आधार पर वास्तविक रूप से लागू करने के साथ राज्यव्यापी योजना तैयार करने की जरूरत थी। इससे जीएसडीपी के 0.15% का अतिरिक्त उधार जुड़ा था। एक हिस्सा तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान में कमी के लिए और दूसरा हिस्सा राजस्व व लागत के बीच के अंतर को घटाने के लिए उपलब्ध कराया गया था (प्रत्येक के लिए जीएसडीपी का 0.05%)। यह वितरण कंपनियों के वित्त में सुधार करता है, पानी और ऊर्जा के संरक्षण को बढ़ावा देता है और बेहतर वित्तीय व तकनीकी प्रदर्शन के माध्यम से सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाता है। 13 राज्यों ने कम से कम एक घटक को, जबकि 6 राज्यों ने डीबीटी घटक को लागू किया है। इसके परिणामस्वरूप 13,201 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज की अनुमति दी गई।

कुल मिलाकर, 23 राज्यों ने 2.14 लाख करोड़ रुपये की क्षमता में से 1.06 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज का लाभ उठाया। परिणामस्वरूप, 2020-21 (सशर्त और बिना शर्त) के लिए राज्यों को दी गई कुल ऋण अनुमति प्रारंभिक अनुमानित जीएसडीपी का 4.5% रही।

हमारे जैसे जटिल चुनौतियों वाले एक बड़े देश के लिए ये एक अनूठा अनुभव था। हमने अक्सर देखा है कि विभिन्न कारणों से योजनाएं और सुधार, बरसों तक निष्क्रिय पड़े रहते हैं। लेकिन इस बार अतीत के उलट ये एक सुखद बदलाव था कि महामारी के बीच बहुत ही कम समय में केंद्र और राज्य जनता के अनुकूल सुधारों को लागू करने के लिए साथ आए। ये ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के हमारे नज़रिए के कारण ही संभव हुआ। इन सुधारों पर काम कर रहे अधिकारी सुझाते हैं कि अतिरिक्त धन के इस प्रोत्साहन के बिना इन नीतियों को लागू करने में बहुत साल लग जाते। भारत ने इससे पहले ‘प्रपंच और विवशता वाले सुधार’ का एक मॉडल देखा है। लेकिन अब ये ‘भरोसे और प्रोत्साहन से सुधार’ का एक नया मॉडल है। मैं उन सभी राज्यों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए इस कठिन समय में इन नीतियों को लागू करने का बीड़ा उठाया। हम 130 करोड़ भारतीयों की तीव्र प्रगति के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

Khushi Bhargav

I am Khushi Bhargav a passionate Content Writer at Vikral News, who loves to share informative and engaging content on Trending News, Lifestyle, Entertainment, Current Affairs, and Viral Stories.

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