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NRLPS ने लोगों और समुदायों को सशक्त बनाने के मिशन के साथ वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व वाले संगठन BRAC इंटरनेशनल के साथ एक MoU पर हस्ताक्षर किए

ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसायटी (NRLPS) ने लोगों और समुदायों को सशक्त बनाने के मिशन के साथ वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व वाले संगठन बीआरएसी इंटरनेशनल के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक प्रमुख कार्यक्रम दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत गरीबों में से सबसे गरीब लोगों के समावेशन हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौता ज्ञापन को अपर सचिव एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसायटी के सीईओ चरणजीत सिंह और भारत के लिए कंट्री लीड, बीआरएसी इंटरनेशनल श्वेता एस बनर्जी ने डीएवाई-एनआरएलएम की संयुक्त सचिव (RL-1) स्मृति शरण, डीएवाई-एनआरएलएम की निदेशक रमन वाधवा और बीआरएसी इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक की उपस्थिति में औपचारिक रूप दिया।

अपने संबोधन में चरणजीत सिंह ने कहा “डीएवाई-एनआरएलएम मिशन एक ऐसे चरण पर पहुंच गया है जहां 100 मिलियन से अधिक महिला सदस्यों को सामुदायिक संस्थानों में संगठित किया गया है।” उन्होंने सबसे पीछे छूट गए लोगों तक पहुंचने में साझेदारी की भूमिका और बीआरएसी के वैश्विक अनुभव का लाभ उठाने पर जोर दिया।

स्मृति शरण ने बताया कि यह साझेदारी डीएवाई-एनआरएलएम के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है जो सार्वभौमिक और समेकित एकजुटता के लिए दृढ़ता से समर्पित है। 100 मिलियन ग्रामीण गरीब परिवारों को पहले से ही संगठित करने के साथ, हमारा ध्यान अब समावेशी आजीविका कार्यक्रम के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ के उत्थान पर केंद्रित है, वहीं स्वयं सहायता समूह अभियान में हाशिए पर रहने वाले लोगों का समावेश भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

शमरन आबेद ने डीएवाई-एनआरएलएम और बीआरएसी इंडिया टीम दोनों को अपनी-अपनी शक्तियों को पहचानने और समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए उनके समर्पण के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सरकार की अगुवाई में समावेशी आजीविका की सुविधा प्रदान करने में मंत्रालय के साथ सहयोग करने के लिए बीआरएसी की तत्परता व्यक्त की।

समावेशी आजीविका का उद्देश्य अंतिम छोर तक समावेशी आजीविका के माध्यम से आत्म-विश्वास, सामाजिक समावेशन और समृद्ध का निर्माण करना है। यह कार्यक्रम उपेक्षित आबादी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समग्र उत्पादक समावेशन रणनीतियों को प्रस्तुत करेगा। यह उन परिवारों तक पहुंचने हेतु डीएवाई-एनआरएलएम कार्यक्रम के लिए विश्व स्तर पर परीक्षण किए गए और “ग्रेजुएशन अप्रोच यानी निरंतर विकासदृष्टिकोण” के अनुरूप अनुकूलित करेगा, जिन्हें वर्तमान में स्वयं सहायता समूह सुरक्षा से लाभ उठाने में कठिनाई हो रही है।

1972 में बांग्लादेश में स्थापित, बीआरएसीअब 17 देशों में काम करता है और किफायती, साक्ष्य-समर्थित उपाय प्रदान करते हुए 100 मिलियन से अधिक लोगों के साथ भागीदारी की है। ऐसा ही एक उपाय विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त “निरंतर विकास दृष्टिकोण” है जिसे निजी संगठनों और सरकारों द्वारा अपनाया गया है तथा सकारात्मक परिणामों के साथ बड़े पैमाने पर मूल्यांकन किया गया है।

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