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एक दिन में 4 ट्रेनों से शुरू करके अब रोजाना 145 ट्रेनें, भारतीय रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए अपने मिशन ‘’घर वापसी’’ को गति दी

फंसे हुए लोगों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के प्रयासों के तहत एक दिन में 2 लाख से ज्यादा प्रवासियों को उनके गंतव्य पर पहुंचाकर मील का पत्थर पार किया | पहली मई से लगभग 5000 यात्रियों से शुरू करके 14 मई को 2.10 लाख से ज्यादा यात्रियों तक, 2 हफ्तों से भी कम समय में इस मील के पत्थर तक पहुंचा भारतीय रेलवे | अब तक इन “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनों से 12 लाख से अधिक यात्री अपने गृह राज्यों में पहुंच चुके हैं

प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए अब तक 1000 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें परिचालित की गईं हैं | प्रति दिन 4 लाख से अधिक फंसे हुए लोगों को “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनों के जरिए उनके गंतव्यों तक पहुंचाने के लिए रेलवे मिशन मोड में प्रति दिन 300 “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनें चलाने को तैयार |

गृह मंत्रालय के आदेश के बाद रेलवे ने लॉकडाउन के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों को उनके गंतव्यों तक पहुंचाने के लिए “श्रमिक दिवस” के अवसर पर 01 मई 2020 से “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनों का परिचालन शुरू किया है।

1 मई 2020 को सिर्फ 4 ट्रेनों से शुरुआत करने के बाद भारतीय रेलवे ने 15 दिन से भी कम अर्से में 1000 से अधिक ऐसी श्रम शक्ति ट्रेनों का परिचालन करने में कामयाबी हासिल की। 14 मई 2020 को एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए विभिन्न राज्यों से कुल 145 “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनों का परिचालन किया गया जिन्होंने 2.10 लाख से अधिक यात्रियों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाया।

यह पहला मौका था, जब एक ही दिन में श्रमिक ट्रेनों में सवार यात्रियों की संख्या 2 लाख का आंकड़ा पार कर गई।

गौरतलब है कि श्रमिक ट्रेनों ने 1 मई 2020 को मात्र लगभग 5000 यात्रियों के साथ परिचालन शुरू किया था।

अब तक इन “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनों से 12 लाख से अधिक यात्री अपने गृह राज्यों में पहुंच चुके हैं।

ये ट्रेनें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल जैसे विभिन्न राज्यों तक गईं।

उल्लेखनीय है कि फंसे हुए समस्त प्रवासियों को उनके घर वापस ले जाने के अपने मिशन के तहत रेलवे राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर प्रतिदिन 4 लाख से अधिक फंसे हुए लोगों को “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनों के जरिए उनके गंतव्यों तक पहुंचाने के लिए प्रतिदिन 300 “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनें चलाने को तैयार है।

रेलवे द्वारा परिचालित ये “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनें केवल दोनों राज्यों- यात्रियों को भेजने वाले राज्य और उनकी अगवानी करने वाले राज्य- की सहमति मिलने के बाद ही चलाई जाती हैं। ट्रेन में सवार होने से पहले यात्रियों की उचित जांच सुनिश्चित की जाती है। यात्रा के दौरान यात्रियों को मुफ्त भोजन और पानी दिया जाता है।

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