पांच ब्रिक्स देशों के शिक्षा मंत्रियों ने आज उच्च शिक्षा, तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (टीवीईटी) में अपने अकादमिक और अनुसंधान सहयोग को और मजबूत करने के संकल्प के साथ एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के हिस्से के रूप में आयोजित ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की 8वीं बैठक में, मंत्रियों ने दो विषयों पर विचार-विमर्श किया-समावेशी व समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल व तकनीकी समाधानों का लाभ उठाना और अनुसंधान व अकादमिक सहयोग को बढ़ाना।
गुणवत्तापूर्ण समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल व तकनीकी समाधानों का लाभ उठाने की जरूरत के संबंध में सदस्य राष्ट्रों ने अपने ज्ञान के आधार को बनाने और इसे विस्तारित करने पर सहमति व्यक्त की, जो इस संबंध में पहल करने में सहायता करेगा। वे एक-दूसरे के साथ ज्ञान और सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों को साझा करने की अनुमति देने वाली प्रणाली के निर्माण की सुविधा के लिए भी सहमत हुए। इनमें संगोष्ठी, नीतिगत संवाद और विशेषज्ञों के साथ बातचीत जैसी कुछ प्रणाली शामिल हो सकती हैं।
अकादमिकों और अनुसंधान में उनके सहयोग को बढ़ाने के लिए, मंत्रियों ने ब्रिक्स देशों में उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच संयुक्त और दोहरी डिग्री को प्रोत्साहित करने के अलावा ब्रिक्स सहयोगी राष्ट्रों के बीच छात्रों व शिक्षकों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने प्रत्येक ब्रिक्स देश के लिए तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में मान्यता दी और इस क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
केंद्रीय शिक्षा, संचार और इलेक्ट्रॉनिकी व सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने इस बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत पूरे विश्व में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, समुदायों और सरकारों के महामारी के प्रभावों को कम करने व एक अधिक लचीली शिक्षा प्रणाली बनाने के लिए किए जा रहे ठोस प्रयासों को स्वीकार करता है। मंत्री ने शिक्षा की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए विशेष रूप से ब्रिक्स देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
संजय धोत्रे ने आगे कहा कि प्रत्येक ब्रिक्स देश की निर्धारित शिक्षा क्षेत्र के विकास लक्ष्यों व उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन शिक्षण व शिक्षा का डिजिटल डिलिवरी महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरा है। इन बातों को देखते हुए यह जरूरी है कि हम सभी के लिए समावेशी व समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए तकनीक का लाभ उठाने के महत्व की पहचान करें।
ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों ने उन नीतियों व पहलों को भी साझा किया जो प्रत्येक देश ने शिक्षा पर कोविड-19 महामारी के प्रभावों को कम करने के लिए शुरू की थी। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए संजय धोत्रे ने मल्टी-मॉडल साधनों के जरिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने के लिए पीएम ई-विद्या के तहत हमारी पहलों के बारे में बताया। उन्होंने स्वयं मूक्स मंच, स्वयं प्रभा टीवी चैनलों, दीक्षा और वर्चुअल प्रयोगशालाओं का उल्लेख किया।
संजय धोत्रे ने आगे कहा कि जब भारत समावेशी व समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डिजिटल और तकनीकी समाधानों की क्षमता का अनुभव करता है तो हम इस क्षमता को पूरा प्राप्त करने में रोकने वाले डिजिटल विभाजन को कम करने व आखिर में इसे खत्म करने की जरूरत को भी स्वीकार करते हैं। इसे देखते हुए, विशेष रूप से सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित जनसंख्या समूहों के मामले में डिजिटल उपकरणों सहित डिजिटल संसाधनों तक पहुंच में असमानता को खत्म करने के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया अभियान और एफटीटीएच कनेक्टिविटी के माध्यम से भारत डिजिटल अवसंरचना का तेजी से विस्तार कर रहा है।
आज की बैठक से पहले, 29 जून को अब तक इस पहल के तहत सदस्य देशों की प्रगति को देखने और इसे आगे ले जाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए ब्रिक्स नेटवर्क विश्वविद्यालयों के अंतरराष्ट्रीय शासी बोर्ड (एनयू आईजीबी) की बैठक हुई थी। वहीं 2 जुलाई को शिक्षा पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में भी वरिष्ठ ब्रिक्स अधिकारियों की एक बैठक हुई थी। इस बैठक में यूजीसी के अध्यक्ष डीपी सिंह और आईआईटी मुंबई के निदेशक प्रोफेसर सुभाशीष चौधरी ने हिस्सा लिया था।
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