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DPIIT ने भारत की लॉजिस्टिक्स दक्षता को बेहतर बनाने के लिए की गई पहलों और सुधारों को दर्शाने के लिए विश्व बैंक के साथ एक बैठक का आयोजन किया

विश्व बैंक की टीम के समक्ष भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता को बेहतर बनाने के लिए की जा रही और की जाने वाली पहलों और सुधारों को दर्शाने के लिए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) सुमिता डावरा की अध्यक्षता में कल नई दिल्ली में एक बैठक का आयोजन किया गया। लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एलपीएआई), नागर विमानन मंत्रालय, रेल मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) तथा राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी) सहित लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (एलपीआई) की समर्पित टीम के नोडल अधिकारी और विश्व बैंक के सदस्य इस बैठक में शामिल हुए।

डीपीआईआईटी के विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लक्षित कार्य योजना को विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा साझा किया गया है और देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता को बेहतर बनाने के लिए बड़ा डेटा तैयार किया जा रहा है। इन प्रयासों से विश्व बैंक एलपीआई में भारत की रैंकिंग बेहतर होगी।

बैठक के दौरान, डीपीआईआईटी ने भारतीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा अपनाई गई श्रेष्ठ प्रथाओं का प्रदर्शन किया, जिनसे भारत की लॉजिस्टिक दक्षता को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। किए गए कुछ सुधारों/पहलों का सारांश इस प्रकार है-

एलपीएआई ने संचालन और सुविधा को डिजिटल बनाने, सभी हितधारकों के बीच सूचना के सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक प्रवाह की बेहतरी के लिए एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) में एक लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (एलपीएमएस) लागू किया है। इसके अलावा स्वचालित प्रवेश और निकास (लैंड पोर्ट पेट्रापोल) के लिए भी स्मार्ट गेट लागू किया है और वे निर्यात रिलीज समय को 101 घंटे से घटाकर 22 घंटे करने के एनटीएफएपी लक्ष्य को पूरा करने में सफल रहे हैं, जबकि लैंड पोर्ट के लिए औसत आयात रिलीज समय 17 घंटे है।

रेल मंत्रालय द्वारा रेलवे ट्रैक के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण की योजना बनाई जा रही है। वित्त वर्ष 2014 और वित्त वर्ष 2023 के बीच ट्रैक निर्माण की गति में 3.6 गुना की वृद्धि हुई है। लोकोमोटिव और वैगन होल्डिंग में वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2030 तक क्रमशः 1.6 गुना और 1.8 गुना वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा देश में माल परिवहन की गति और आकार को बेहतर बनाने के लिए पूंजीगत व्यय (केपेक्स) बढ़ाकर 31.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। इसके साथ-साथ पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल कॉरिडोर के कार्यान्वयन से 50 से 60 किलोमीटर की औसत गति प्राप्त हो रही है, जो नियमित रेलवे ट्रैक की तुलना में लगभग तीन गुना है।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने निर्यातकों, आयातकों और सेवा प्रदाताओं को दस्तावेज़ों का सहज आदान-प्रदान और व्यापार करने में मदद के लिए संपूर्ण लॉजिस्टिक्स समाधानों को शामिल करते हुए एक राष्ट्रीय समुद्री एकल विंडो प्लेटफ़ॉर्म एनएलपी मरीन लॉन्च किया है।

एंट्री बिल और शिपिंग बिल जैसे विभिन्न एपीआई के लिए सीबीआईसी का आइसगेट (सीमा शुल्क स्वचालित पोर्टल) यूलिप के साथ एकीकृत किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने एईओ पोर्टल लॉन्च करके एईओ टी1 अनुप्रयोगों के लिए एप्लिकेशन फाइलिंग, प्रोसेसिंग और एईओ प्रमाणन की डिजिटल हस्ताक्षरित डिलीवरी को डिजिटल कर दिया है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 35 मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी), 108 पोर्ट कनेक्टिविटी परियोजनाएं और 608 वे-साइड सुविधा स्थलों की योजना बनाई है। फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली है जो सीधे प्रीपेड या उससे जुड़े बचत खाते या सीधे टोल मालिक के साथ टोल का भुगतान करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान का उपयोग करने वाली तकनीक को भी लॉन्च किया गया है।

ई-एयर वे बिल (ई-एडब्ल्यूबी) और ई-कार्गो सुरक्षा घोषणा नागर विमानन मंत्रालय द्वारा किये गए डिजिटल उपाय हैं। ई-गेटपास का कार्यान्वयन सितंबर 2024 में किया जाएगा।

विश्व बैंक के वरिष्ठ परिवहन अर्थशास्त्री जीन-फ्रांस्वा आर्विस ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डिजिटल उपाय में वृद्धि के लिए भारत द्वारा किए जा रहे निर्णायक प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने एलपीआई की गणना पहुंच में होने वाले बदलाव के बारे में भी जानकारी दी। वर्ष 2023 में, नए केपीआई की शुरुआत की गई, जिनसे विश्व में व्यापार की वास्तविक गति का मापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए केपीआई शिपिंग कंटेनर, एयर कार्गो और पार्सल को कवर करने वाले बड़े वैश्विक ट्रैकिंग डेटासेट (बिग डेटा) से प्राप्त किए गए हैं। कुछ बड़े डेटा स्रोतों में कंटेनर ट्रैकिंग डेटा, वैश्विक डाक डेटा, डाक सेवाओं द्वारा प्रबंधित अंतर्राष्ट्रीय एक्सप्रेस और पार्सल, आईएटीए द्वारा एयरवे बिल डेटा, जहाज ट्रैकिंग डेटा, आयात का समय, निर्यात का समय, हवाई अड्डे का समय और डाक वितरण समय आदि शामिल हैं।

डीपीआईआईटी के विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) ने कहा कि लक्षित उपायों वाली इन पहलों से देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता बेहतर होगी। इसके अलावा डीपीआईआईटी और अंतर-मंत्रालयी समर्पित टीम एलपीआई विकसित करने की पद्धति को समझने के लिए विश्व बैंक के साथ मिलकर लगातार काम करेगी।

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