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दूरसंचार विभाग ने पेश किया नया ऑनलाइन पोर्टल, स्पेक्ट्रम ट्रायल और अन्य चीजों में आएगी तेजी

स्पेक्ट्रम आधारित अनुप्रयोगों को प्रोत्साहित करने के लिए और प्रयोग, प्रदर्शन और परीक्षण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में, वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन विंग (डब्ल्यूपीसी), दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने आज प्रयोग, प्रदर्शन आदि के संचालन में स्पेक्ट्रम का उपयोग करने के लिए ऑनलाइन लाइसेंसिंग सुविधा प्रदान करने वाली पहल की शुरुआत की है। दूरसंचार विभाग के मौजूदा सरल संचार पोर्टल का विस्तार, जिस पर एक्सेस सेवाओं, इंटरनेट सेवाओं और अन्य लाइसेंसों के लिए आवेदन प्राप्त किए जाते हैं, प्रयोग, प्रदर्शन, परीक्षण, निर्माण आदि का संचालन करने में स्पेक्ट्रम का उपयोग करने के लिए लाइसेंस की प्राप्ति, प्रक्रिया और अनुदान के लिए कर दिया गया है। इसके अलावा, डब्ल्यूपीसी विंग से प्राप्त होने वाली लगभग सभी आवश्यक स्वीकृतियां, जिनमें उपकरण के प्रकार, उपग्रह लाइसेंस, अव्यवसायी लाइसेंस, स्टैंडिंग कमेटी ऑफ रेडियो फ्रीक्वेंसी ऐलोकेशन द्वारा किए जाने वाले आवंटन आदि की स्वीकृतियां शामिल हैं, ऑनलाइन हो चुकी हैं।

प्रयोगों के लिए इन ऑनलाइन लाइसेंसों को जारी करते हुए, दूरसंचार सचिव, श्री अंशु प्रकाश ने आशा व्यक्त की कि इससे वायरलेस प्रौद्योगिकियों में डिजाइन और अनुप्रयोगों के ईको सिस्‍टम को बढ़ावा मिलेगा। अनुमोदन की प्रक्रिया फेसलेस, पारदर्शी और समयबद्ध भी होगी। लाइसेंस के रूप में प्रदान की गई स्वीकृतियों में वायरलेस उपकरण रखने की मंजूरी, आवश्यक मॉड्यूल और सबसिस्टम का आयात और अनुसंधान एवं विकास उत्पादों का प्रदर्शन आदि शामिल होंगे। इस प्रकार से संबद्ध गतिविधियों के लिए अलग से स्वीकृति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी। सभी स्वीकृतियों को अब एक साथ जोड़ दिया गया है।

प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

आंतरिक प्रयोग (आर एंड डी), आंतरिक प्रदर्शन और उत्पादन के लिए स्व-घोषणा (लाइसेंस की तत्काल प्राप्ति)।
उपयोगकर्ता की सभी लाइसेंसिंग आवश्यकताओं के लिए केवल एक लाइसेंस- स्पेक्ट्रम का उपयोग, संबंधित उत्पादों और उप-संयोजनों का आयात, प्रदर्शन, वायरलेस उपकरणों पर अधिकार की प्राप्ति आदि।
आवेदन के दिन से 6 से 8 सप्ताह के भीतर सभी आउटडोर रेडिएशन लाइसेंस के लिए डीम्ड अनुमोदन।
स्पेक्ट्रम “गैर-हस्तक्षेप और गैर-संरक्षण” और “गैर-वाणिज्यिक सेवाएं” के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है।

इन उपायों के माध्यम से भारतीय कंपनियों के लिए अनुसंधान एवं विकास और विनिर्माण ईको सिस्‍टम को मजबूत करने और भारतीय आईपीआर और वैश्विक समाधान का निर्माण करने में आसानी होगी। इससे वैश्विक प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखला में भारतीय योगदान को बढ़ाने वाली क्षमता का निर्माण होगा, साथ ही भारत को वायरलेस उत्पादों और अनुप्रयोगों के केंद्र के रूप में भी बढ़ावा मिलेगा।

Dheeru Bhargav

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