रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी), एक डीम्ड विश्वविद्यालय का इसकी छठी आम सभा की बैठक के लिए का दौरा किया। वह संस्थान के अध्यक्ष और कुलाधिपति हैं। इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह है बड़े गर्व की बात है कि संस्थान रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम संचालित करके राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री की दृष्टि हमारे देश को आत्मनिर्भर भारत बनाने की है। इस दिशा में हमने देश में रक्षा प्रौद्योगिकियों और विनिर्माण के स्वदेशीकरण के लिए अनेक कदम उठाए हैं। इन पहलों के लिए भविष्य में युद्ध के कौशल से लैसप्रौद्योगिकीविदों के बड़े समूह की आवश्यकता है।”
रक्षा मंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) ने क्वांटम प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स वऑटोमेशन तथा रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में नए स्कूल खोलकर इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई है। भारतीय मूल के प्रख्यात प्रोफेसरों के साथ इस तरह की प्रगति और मान्यता प्राप्त विदेशी संस्थानों के सहयोग से यह संस्थान एक अग्रणी प्रौद्योगिकी केंद्र में बदल जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) ने क्वांटम प्रौद्योगिकियों और रोबोटिक्स के क्षेत्र में अंतःविषय अनुसंधान और शिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने इन तकनीकों में कुछ प्रदर्शन भी देखे।
रक्षा मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा में युवा इंजीनियरिंग पेशेवरों के उपयोग हेतु ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है जो भविष्य की सूचना सुरक्षा और युद्धशास्त्र के लिएआवश्यक हैं। उन्होंने कहा, “यह जानकर खुशी हो रही है कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) द्वारा 1,500 युवा पेशेवरों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।” यह कदम महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाते हैं। हाल के वर्षों में बेहतर गुणवत्ता के साथ एमटेक, एमएससी और पीएचडी में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पुस्तकें, पेटेंट और पेपर प्रकाशन बढ़ रहे हैं, जो संस्थान की अकादमिक प्रगति को प्रदर्शित करते हैं।
जीबीएम के बाद रक्षा मंत्री ने उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकीसंस्थान (डीआईएटी) संकाय, छात्रों और कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) मान्यता प्राप्त विदेशी संस्थानों के भारतीय मूल के प्रख्यात प्रोफेसरों के साथ सहयोग करने की प्रक्रिया में है जो हमारे संस्थान को इन क्षेत्रों में एक अग्रणी प्रौद्योगिकी संस्थान बनाने की दिशा में और करीब ले जाएगा। रक्षामंत्री ने इन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में अग्रणी स्थान हासिल करने केलिए उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) को बधाई दी।
उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी), जो हमारी रक्षा सेवाओं के लिए मिसाइल प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, क्रिप्टोलॉजी जैसेविभिन्न अल्पकालिक विशेष पाठ्यक्रम भी संचालित करता है, की विशिष्टता के बारे में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “संस्थान ने कई अंतर्राष्ट्रीय कार्यशालाओं का आयोजन किया है। सशस्त्र बलों और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को इस तरह की कार्यशालाओं के माध्यम से लगातार अपडेट किया जाता है और इस विश्वविद्यालय से नियमित डॉक्टरेट और स्नातकोत्तर उपाधिप्राप्त की जाती है।”
उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) की अकादमिक उत्कृष्टता के बारे में बोलते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा, “संस्थान के संकाय सदस्य अपने क्षेत्र में अग्रणी हैं और मुझे यह भी सूचितकिया गया है कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) के 03 प्रोफेसरों को दुनिया में शीर्ष दो प्रतिशत वर्ग में स्थान दिया गया है। मैं उन्हें बधाई देता हूं और इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए और भी बहुतसे लोगों की कामना करता हूं।
रक्षा मंत्री ने परिसर में पीएचडी विद्वानों/अंतर्राष्ट्रीयछात्रों/ विजिटिंग फैकल्टी के लिए नवनिर्मित वैवाहिक आवास का उद्घाटन किया। छात्रावास के उद्घाटन के बाद उन्होंने उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) की मुक्त अंतरिक्ष ऑप्टिकल संचार परियोजना का प्रदर्शन देखा।
राजनाथ सिंह ने महामारी के दौरान देश के संकट के समय में आगे आने के लिए उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी) और रक्षा अनुसंधान और विकाससंगठन (डीआरडीओ) की प्रशंसा की। इस समय में उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकीसंस्थान (डीआईएटी) ने कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए नौ पेटेंट हासिल किएऔर उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर इन प्रौद्योगिकियों का उत्पादन किया।
इस अवसर पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव औरडीआरडीओ के अध्यक्ष जी सतीश रेड्डी, डीआईएटी के कुलपति डॉ सी पीरामनारायण, वरिष्ठ संकाय सदस्य, वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी एवं गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
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